नई दिल्ली: केंद्र और राज्य सरकार में सरकार की सहयोगी शिवसेना भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर धीरे-धीरे और सख्त होती दिख रही है। पिछले महीने एनडीए की बैठक में सर्वसम्मति से मंजूर हुए प्रस्ताव का शिवसेना ने अचानक विरोध किया है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में आयोजित पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में अपनी भूमिका रखी। (दिलचस्प है IAS और विधायक की लव स्टोरी, जल्द करेंगे शादी)
अप्रैल महीने के दूसरे हफ्ते में नई दिल्ली में एनडीए की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री और लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान की अगुवाई में यह प्रस्ताव सर्वसम्मत हुआ कि एनडीए 2019 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। इस बैठक में शरीक होने नई दिल्ली पहुंचे उद्धव ठाकरे ने तब इस प्रस्ताव को स्वीकार किया था।। लेकिन, एनडीए की इस बैठक के 22 दिन के बाद उद्धव को यह प्रस्ताव जबरदस्ती का प्रस्ताव लग रहा है।
बुधवार को मुंबई में प्रत्रकारों से बात करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि, रामविलास पासवान ने जबरन लिखवाया कि 2019 में मोदी के नेतृत्व में लड़ेंगे। इतनी जल्दबाजी क्यों? आज जो समर्थन मिला है पहेल वो तो देश के काम आए। वैसे चुनाव में अभी 2 साल बाकी हैं। अपने नेतृत्व को थोपने की आखिर भाजपा को इतनी जल्दबाज़ी क्यों? ऐसे फैसले शिवसेना को बिल्कुल मंजूर नहीं है।
शिवसेना ने पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा दो भारतीय जवानों की हत्या के मुद्दे पर भी केंद्र पर अपना हमला तेज कर दिया है। पार्टी ने कहा कि महज निंदा पर्याप्त नहीं होगी और पूछा कि जो लोग गो हत्या के खिलाफ हैं क्या उन्हें सैनिकों की हत्या से कोई फर्क नहीं पड़ता। पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के लिए मोदी सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच शिवसेना ने कहा कि पड़ोसी देश को सबक सिखाया जाना चाहिए।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी थी कि वह अपनी मन की बात बंद करें और इसके बदले में दो भारतीय सैनिकों की हत्या करने और उनके शव को क्षत-विक्षत करने के लिए पाकिस्तान को दंडित करने के लिए गन की बात शुरू करें। उन्होंने कहा, यही समय है कि--वह :प्रधानमंत्री: मन की बात बंद करें और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए गन की बात शुरू करें। उन्होंने कहा, मामले में जो कुछ भी किए जाने की आवश्यकता है, वह अब किया जाना चाहिए।
पार्टी मुखपत्र सामना में आज प्रकाशित संपादकीय में शिवसेना ने कहा कि देश में खराब हालात का पता इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान जैसा एक छोटा देश भी हर दिन भारत के आत्मसम्मान का कत्ल कर रहा है। सामना ने लिखा है, क्या हमें जय जवान, जय किसान का नारा लगाने का और अधिकार है। सैनिकों की बर्बर तरीके से हत्या की महज निंदा करने से पाकिस्तान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नये रक्षा मंत्री :अरूण जेटली: कहते हैं कि सैनिकों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। लेकिन दुर्भाग्य से हमें कहना पड़ रहा है कि बलिदान व्यर्थ जा रहा है। उसने लिखा है, जिस दिन लोग अपनी निद्रा से बाहर आएंगे और इस सरकार की विफलता को देखेंगे, तब तक काफी देर हो चुकी होगी।
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