नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में राजभवन भेजी गयी एमएलसी (mlc) की लिस्ट को लेकर अखिलेश सरकार की मुश्किलें बढ़ गई है। गवर्नर राम नाइक ने आज कहा कि जिन नामों को उन्होंने सरकार के पास वापस भेजा है अगर उनके ऐफिडेविट ग़लत पाए गए तो उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला बनता है। गवर्नर ने कल लिस्ट में से चार नामों को तो मंजूरी दे दी थी लेकिन पाँच नाम मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव को कुछ सवालों के साथ वापस भेज दिए थे।
क्या है मामला
मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव ने मई में एमएलसी के लिए नौ लोगो की लिस्ट राजभवन भेजी थी लेकिन गवर्नर राम नाइक को इनमें से सिर्फ चार लोग एमएलसी बनाने के लायक लगे। गवर्नर ने कल पाँच लोगो के नाम सरकार को वापस भेज दिए और कहा कि इन पर कई तरह के आरोप है जिनकी सरकार जाँच कराए। आज गवर्नर का रुख और कड़ा दिखा उन्होंने कहा कि अगर इन पाँचों ने ग़लत ऐफिडेविट लगाए है तो इनके खिलाफ आपराधिक मामला बनता है।
पत्रकार की शिकायत से खुला मामला
यूपी में विधान परिषद की 9 सीटे 25 मई को खाली हो गई थी सरकार ने 9 लोगो के नाम की एक लिस्ट इसके पहले ही राजभवन भेजी थी। लेकिन लिस्ट के साथ साथ राजभवन में पत्रकार सच्चिदानंद सच्चे का शिकायती पत्र भी राजभवन पहुँच गया। पत्र में कहा गया कि लिस्ट में भेजे गए लोगो को mlc नही बनाया जां सकता क्योंकि कानूनन इन पदो पर नॉमिनेशन सिर्फ उन लोगो का हो सकता है जिन्होंने साहित्य, कला, सहकारिता आंदोलन, सामाजिक केशत्र या विज्ञान के के श्रेत्र में बड़ा योगदान किया हो। लेकिन सरकार के भेजे नौ नामों में से एक भी ये शर्तें पूरी नही करता।
साथ में ये भी कहा गया कि एमएलसी के लिए चुना गया व्यक्ति संविधान की धारा 171(5) के मुताबिक राजनीतिक दल का नही होना चाहिए।
कला विज्ञान,साहित्य सहकारिता आंदोलन या सामाजिक फील्ड से जुड़ा होना चाहिए।
2010 के लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक जो किसी पार्टी का पूर्व या वर्तमान का पदाधिकारी हो।
लोकसभा, विधान सभा या पंचायत का चुनाव लड़ा हो उसे सामाजिक सेवा की श्रेणी में नही माना जएगा। इनमें से ज्यादातर ने अपना नामांकन सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर किया था।
गवर्नर ने जिन पाँच लोगों के नाम वापस किए
1.कमलेश पाठक 2009 में अकबरपुर से समाजवादी पार्टी का चुनाव लड़ चुके हैं।
अपने एफीडेविट में कमलेश पाठक ने कई मुकदमे होने के सूचना दी है। इस तरह कमलेश सपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ा और उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी है इसलिये उनका नामिनेशन नही हो सकता।
2. संजय सेठ (यूपी के बड़े बिल्डर)
उनके यहा अभी इनकम टैक्स की रेड भी पड़ी थी संजय सेठ कला, सामाजिक कार्य और सहकारिता साहित्य या विज्ञान किसी भी क्षेत्र से नही आते वो सिर्फ बिल्डर है और मुलायम सिंह के करीबी है।
3. राजपाल कश्यप (सपा के प्रदेश सचिव)
मत्स्य निगम के चेयरमैन है दर्जा प्राप्त मंत्री है इसलिये वो नामिनेशन की शर्तें नही पूरी करते।
4. सरफराज खान
आज़म खान के करीबी बताए जाते है। 2012 में सहारनपुर से विधानसभा का चुनाव सपा टिकट से लड़े है।
5. रनविजय सिंह (गोंडा में सपा के नेता है)
गौरतलब है कि कल मुख्यमन्त्री ने गवर्नर राम नाइक से मुलाकात की थी इसके बाद राजभवन से एसआरएस यादव.लीलावती कुशवाहा,रामबक्श सिंह और जितेन्द्र यादव के नाम को तो मंजूरी दे दी लेकिन इन पाँचों के नाम सवाल लगा के वापस भेज दिए ।