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स्वाति मालीवाल विवाद से राघव चड्ढा की बगावत तक, AAP के अंदरूनी कलह की कहानी

 Published : Apr 25, 2026 12:28 pm IST,  Updated : Apr 25, 2026 12:28 pm IST

अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी में इतनी बड़ी टूट नहीं हुई थी। राघव चड्ढा समेत राज्यसभा के 7 सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इस घटना ने पार्टी के भीतर की गहरी दरारों को उजागर कर दिया।

Swati Maliwal- India TV Hindi
स्वाति मालीवाल Image Source : PTI

नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी में एक बड़ी टूट हो गई है। राघव चड्ढा राज्यसभा के सात सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। इस कदम ने पार्टी के भीतर की गहरी दरारों को उजागर कर दिया और महीनों से चल रहे तनाव में एक निर्णायक मोड़ ला दिया। जो घटना अचानक और चौंकाने वाली राजनीतिक हार जैसी लग रही थी, वह असल में सत्ता के लिए लंबे समय से चल रही खींचतान, आपसी मतभेदों और अरविंद केजरीवाल तथा उनके नेताओं के बीच बढ़ते अविश्वास का नतीजा थी।

इस संकट की जड़ें 2024 में तलाशी जा सकती हैं, जब एक और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया था कि 13 मई को तत्कालीन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर उनके एक करीबी सहयोगी ने उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया था। उस घटना ने एक ऐसी प्रतिक्रिया शुरू कर दी, जिसने AAP के भीतर की दरारों को धीरे-धीरे और चौड़ा कर दिया। आखिरकार, यह स्थिति एक खुले विभाजन में बदल गई, जिससे अब AAP के लिए कई अहम राज्यों में उसके राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

यह सब कैसे शुरू हुआ

मालीवाल के आरोपों के बाद पैदा हालात के चलते पार्टी के भीतर बढ़ती खाई का साफ संकेत मिल चुका था। इस मुद्दे ने न केवल पार्टी के भीतर गंभीर सवाल खड़े किए, बल्कि सीनियर  नेताओं के बीच भी साफ तौर पर बेचैनी पैदा कर दी, जिससे आगे और अधिक मनमुटाव की जमीन तैयार हो गई। इस महीने की शुरुआत में यह खाई और गहरी हो गई, जब पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटा दिया। औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने से पहले ही, ऐसे पुख्ता संकेत मिल रहे थे कि कई सांसद अब पार्टी के साथ शायद ही बने रहेंगे।

हालांकि अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और संदीप पाठक जैसे नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर शायद ही कभी अपनी असहमति जाहिर की थी, लेकिन पार्टी छोड़ने का उनका फैसला पार्टी के भीतर कई लोगों के लिए एक चौंकाने वाली बात थी।

चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने की बात की पुष्टि की। राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल का इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके घर और दफ़्तरों पर, जिसमें पंजाब की लवली प्रोफ़ेशनल यूनिवर्सिटी भी शामिल है, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक मामले में छापे मारे थे।

AAP नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह सामूहिक इस्तीफ़ा BJP के ऑपरेशन लोटस का हिस्सा था। उन्होंने दावा किया कि सांसदों ने दबाव में आकर इस्तीफ़ा दिया, क्योंकि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का डर था।

AAP में राघव चड्ढा का सफ़र

कभी अरविंद केजरीवाल के क़रीबी माने जाने वाले चड्ढा पार्टी में तेज़ी से आगे बढ़े और 2022 में पंजाब से राज्यसभा के लिए चुने गए। पंजाब विधानसभा चुनावों में AAP की जीत के बाद उनका प्रभाव काफ़ी बढ़ गया, जिससे वे मुख्यमंत्री भगवंत मान के बाद राज्य के सबसे ताक़तवर नेताओं में से एक बन गए।

हालांकि, 2024 में आबकारी नीति मामले में केजरीवाल की गिरफ़्तारी के बाद उनकी हैसियत तेज़ी से गिरी। पार्टी के भीतर चड्ढा से अहम मौकों पर उनकी गैर-मौजूदगी जैसे  केजरीवाल की गिरफ़्तारी और राजनीतिक मुद्दों पर उनकी चुप्पी को लेकर सवाल पूछे गए।

उन्हें धीरे-धीरे अहम पदों से हटा दिया गया, इनमें पंजाब मामलों के सह-प्रभारी और चुनाव रणनीतिकार जैसे पद शामिल हैं क्योंकि पार्टी नेतृत्व ने उन पर एक ऐसे नाज़ुक दौर में खुद को अलग-थलग करने का आरोप लगाया, जब केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे कई बड़े नेता कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे थे।

AAP ने राज्यसभा में राघव चड्ढा का ओहदा घटाया

इस संकट की तात्कालिक वजह तब सामने आई, जब इस महीने की शुरुआत में चड्ढा को राज्यसभा में AAP के उप-नेता के पद से हटा दिया गया। उस समय उन्होंने चेतावनी दी थी कि वे सही समय आने पर जवाब देंगे, और खुद की तुलना एक नदी से की थी जो बाढ़ का रूप ले सकती है। उनकी यह चेतावनी सांसदों के एक साथ इस्तीफ़ा देने के रूप में सच होती दिखी, जिससे पंजाब, गुजरात और गोवा में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पार्टी को एक बड़ा झटका लगा।

मालीवाल ने भ्रष्टाचार और उत्पीड़न की चिंताओं का किया ज़िक्र 

एक विस्तृत बयान में स्वाति मालीवाल ने कहा कि पार्टी छोड़ने का उनका फ़ैसला बेरोकटोक भ्रष्टाचार, महिलाओं के कथित उत्पीड़न और मारपीट और केजरीवाल के नेतृत्व में गुंडागर्दी करने वाले तत्वों को बढ़ावा दिए जाने की चिंताओं से प्रेरित था।

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