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दुनिया की सभी समस्याओं के मूल कारण क्या हैं? RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बताया

 Reported By: Yogendra Tiwari, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Aug 07, 2025 10:53 pm IST,  Updated : Aug 07, 2025 11:01 pm IST

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में भगवान शिव के एक मंदिर में दर्शन के दौरान संबोधन दिया। उन्होंने इस दौरान इस मुद्दे पर बात की कि दुनिया की सभी समस्याओं के मूल कारण क्या हैं?

Mohan bhagwat- India TV Hindi
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। Image Source : PTI

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि दुनिया की सभी समस्याओं का मूल कारण मानव स्वभाव की पांच-छह प्रवृत्तियां हैं। इनमें मनुष्य का लोभ, स्वार्थ शामिल है, जिसके कारण सभी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य की कट्टरता क्रोध और घृणा पैदा करती है, जिससे लड़ाई-झगड़े होते हैं। मोहन भागवत नागपुर में भगवान शिव के एक मंदिर में दर्शन के दौरान एक समारोह में बोल रहे थे।

शिव का स्वरूप निस्वार्थ है- मोहन भागवत

मोहन भागवत ने भगवान शिव के मूल्यों और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "शिव का स्वरूप निस्वार्थ है और मानवता के लिए सब कुछ है। हमें इसी प्रकार जीवन जीने की आवश्यकता है। भागवत ने आगे विस्तार से कहा कि दुनिया की सभी समस्याओं का मूल कारण मानव स्वभाव की पांच-छह प्रवृत्तियां हैं। इनमें मनुष्य का लोभ, स्वार्थ शामिल है, जिसके कारण सभी समस्याएं हैं और मनुष्य की कट्टरता क्रोध और घृणा पैदा करती है, जिससे लड़ाई-झगड़े होते हैं।"

सच्ची शिव भक्ति क्या है?

मोहन भागवत ने कहा कि- "दूसरों को न मिले, मुझे मिले' जैसी स्वार्थी मानसिकता लोगों के बीच भेदभाव करने की प्रवृत्ति पैदा करती है। भागवत ने आगे कहा कि इन प्रवृत्तियों को बदलने के लिए भगवान शिव की भक्ति करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने लिए चीज़ें पाने की इच्छा न रखते हुए, विनम्रता और सभी के प्रति करुणा का जीवन अपनाना चाहिए। भागवत ने कहा कि ऐसी पवित्र जीवन शैली की ओर प्रतिदिन एक कदम बढ़ाना ही सच्ची शिव भक्ति है।"

भारत को विश्व का नेतृत्व करना होगा- भागवत

भागवत ने यह भी कहा कि आज विचारक और बुद्धिजीवी कह रहे हैं कि दुनिया में परिवर्तन हो रहा है। समय बदल रहा है और इस बदलते युग में, यदि मनुष्य सही दिशा में उचित कदम नहीं उठाएगा तो विनाशकाल का सामना करना पड़ेगा। लेकिन, यदि सही दिशा में उचित कदम उठाए जाएं तो मानवता का एक नया उन्नत स्वरूप उभरेगा। और इस उन्नत स्वरूप के उदय के लिए, भारत को विश्व का नेतृत्व करना होगा। भागवत ने कहा कि भारत में इस दुनिया के लोगों के जीवन को बदलने की शक्ति है। भारत में वह शक्ति है कि वह दुनिया को राहत दे सके।

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