1. Hindi News
  2. भारत
  3. उत्तर प्रदेश
  4. SP-कांग्रेस गठबंधन ने किया प्रतिद्वंद्वियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर

SP-कांग्रेस गठबंधन ने किया प्रतिद्वंद्वियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर

 Written By: Bhasha
 Published : Feb 07, 2017 12:50 pm IST,  Updated : Feb 07, 2017 12:50 pm IST

लखनऊ: शुरआती हिचकोलों के बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन के विधानसभा चुनाव प्रचार के जोर पकड़ने के मद्देनजर प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों बसपा और भाजपा को मुस्लिम बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति में रद्दोबदल करना पड़ा है।

Rahul-Akhilesh- India TV Hindi
Rahul-Akhilesh

लखनऊ: शुरआती हिचकोलों के बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन के विधानसभा चुनाव प्रचार के जोर पकड़ने के मद्देनजर प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों बसपा और भाजपा को मुस्लिम बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति में रद्दोबदल करना पड़ा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 140 विधानसभा सीटें हैं। करीब 26 जिलों में फैले इन विधानसभा क्षेत्रों में पहले दो चरणों में 11 और 15 फरवरी को मतदान होना है। प्रदेश के सबसे ताकतवर यादव परिवार में झगड़े की वजह से अपनी राह को बहुत आसान मानकर चल रही बसपा के लिये सपा और कांग्रेस का गठबंधन होना एक झटके की तरह है।

बसपा खुद को भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत ताकत के रूप में पेश कर रही है लेकिन सपा और कांग्रेस के गठबंधन के रूप में मुस्लिमों के सामने एक और विकल्प आ गया है। बसपा के खिलाफ एक और बात भी जाती है। वह पूर्व में भाजपा के साथ मिलकर राज्य में तीन बार सरकार बना चुकी है, जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है। मुस्लिम बहुल सीटें जीतने के लिये बसपा ने पहले दो चरणों में जिन सीटों के लिए मतदान होना हैं उनमें से करीब 50 पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। उसे भरोसा है कि दलित वोटों के साथ मुस्लिम मतदाता भी उसी के पक्ष में मतदान करेंगे, जिससे उसके उम्मीदवारों की नैया पार हो जाएगी।

बहरहाल, सपा और कांग्रेस के साथ आने से मुसलमानों के सामने बसपा के मुकाबले एक और मजबूत विकल्प आ गया है। इसके बाद बसपा ने मुस्लिम धर्मगुरओं के दरवाजों पर दस्तक देना शुरू कर दिया है और उनमें से कुछ ने उसे समर्थन देने का एलान भी कर दिया है। बसपा की ही तरह सपा ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 140 में से 42 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। बसपा मुखिया मायावती जहां सपा के गुंडाराज को निशाना बना रही हैं, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन भी बसपा के इतिहास के पन्ने उलटने में कोई गुरेज नहीं कर रहा है। यह गठबंधन मतदाताओं को बसपा द्वारा उसी भाजपा के साथ मिलकर तीन बार सरकार बनाने की बात याद दिला रही है, जिसके खिलाफ मायावती अपनी पार्टी को सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी के तौर पर पेश कर रही हैं।

सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि क्या मुसलमान इस बात को भुला पाएंगे कि मायावती के ही मुख्यमंत्रित्वकाल में सबसे ज्यादा 43 मुस्लिम नौजवानों को आतंकवाद के झूठे आरोपों में फंसाया गया था। टेरर पालिटिक्स खेलने के लिये मायावती को मुस्लिम कौम कैसे माफ कर सकती है। दूसरी ओर, बसपा भी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव द्वारा अपने मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव को मुस्लिम विरोधी बताये जाने को भुनाने में जुटी है। बसपा में हाल में शामिल हुए तत्कालीन कौमी एकता दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने मुलायम के इस बयान को दोहराते हुए कहा कि बेटे को उसके पिता से बेहतर कौन जान सकेगा। सम्भवत: मुस्लिम मतों के महत्व को देखते हुए ही सपा ने जाट जनाधार रखने वाले चौधरी अजित सिंह की अगुआई के राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन करने में बहुत कम दिलचस्पी दिखायी थी।

वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों में जाटों और मुसलमानों के बीच ही खूनी संघर्ष हुआ था। उधर, भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिन्दू मतों के धु्रवीकरण का सहारा है। शायद यही वजह है कि उसने अक्सर भड़काउ भाषण देने के लिये चर्चित रहने वाले तथाकथित हिन्दुत्ववादी नेताओं योगी आदित्यनाथ, संगीत सोम, सुरेश राणा, हुकुम सिंह, संजीव बालयान और रामचन्द्र कठेरिया को इस क्षेत्र के चुनाव प्रचार में उतारा है।

Latest Uttar Pradesh News

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Uttar Pradesh से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत