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बिना जरूरत ही कर देते थे मरीजों के दिल की सर्जरी, कश्मीर में सामने आया बड़ा 'पेसमेकर घोटाला'

 Published : Jun 20, 2026 10:43 pm IST,  Updated : Jun 20, 2026 10:43 pm IST

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग मेडिकल कॉलेज में पेसमेकर घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें करीब 50% मरीजों की बिना जरूरत सर्जरी कर दी गई। जांच में फर्जी रिकॉर्ड, आर्थिक शोषण और नियमों की अनदेखी सामने आई है।

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कई मरीजों की बिना इजाजत दिल की सर्जरी कर दी गई थी। Image Source : PEXELS REPRESENTATIONAL

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि जिन मरीजों की दिल की सर्जरी की गई, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत को वास्तव में इसकी जरूरत ही नहीं थी। मामले के सामने आने के बाद शनिवार को एक सीनियर डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बताया कि जांच में फर्जी बीमा दावे, मरीजों का शोषण और स्वस्थ मरीजों की अनावश्यक सर्जरी किए जाने के मामले सामने आए हैं।

डॉ. सैयद मकबूल का नाम आया सामने

विभाग ने अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सैयद मकबूल का नाम लेते हुए उन पर बड़े पैमाने पर प्रक्रियागत अनियमितताओं और आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर करने के आरोप लगाए हैं। यह मामला कथित पेसमेकर घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कुल 103 हृदय रोगी शामिल हैं। विशेषज्ञों की जांच में पाया गया कि जिन 55 मरीजों का पेसमेकर लगाया गया था, उनमें से 27 का हृदय सामान्य था और उन्हें पेसमेकर लगाने की कोई जरूरत नहीं थी।

बिना इजाजत भी कर दी जाती थी सर्जरी

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्र जांच में यह सामने आया कि जिन 55 मरीजों की 'लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंग' सर्जरी की गई, उनमें से 27 मरीजों (49 प्रतिशत) को इसकी जरूरत नहीं थी। डॉक्टर के खिलाफ आरोपों में रिकॉर्ड में हेरफेर, सिस्टम स्तर पर धोखाधड़ी, मरीजों का शोषण, विक्रेताओं के साथ मिलीभगत और बिना इजाजत सर्जरी करना शामिल है। जांच में कहा गया कि यह मामला व्यक्तिगत लाभ के लिए मरीजों की सुरक्षा और पेशेवर नैतिकता की अनदेखी को दर्शाता है। नोटिस में कहा गया,

'बिना जरूरत के सर्जरी करना व्यक्तिगत लाभ के लिए मरीजों की सुरक्षा और पेशेवर नैतिकता की पूरी तरह अनदेखी को दर्शाता है।'

लाभार्थियों के आर्थिक शोषण के भी आरोप

दिसंबर 2025 में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा 'लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंग' से जुड़े दावों में असामान्य वृद्धि देखे जाने के बाद इस मामले की एक्सपर्ट जांच कराई गई थी। जांच में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-सेहत योजना के लाभार्थियों के आर्थिक शोषण के भी आरोप सामने आए हैं। एक मामले में कहा गया कि मरीज को एक प्राइवेट कंपनी को 70,000 रुपये देने के लिए मजबूर किया गया। रिपोर्ट में कहा गया, 'लाभार्थियों का यह आर्थिक शोषण गंभीर आपराधिक कदाचार है।' जांच में यह भी सामने आया कि अनिवार्य मंजूरियों, गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े सुरक्षा उपायों और खरीद प्रक्रिया के नियमों की अनदेखी की गई।

जांच पूरी होने तक सस्पेंड रहेंगे डॉक्टर मकबूल

जम्मू-कश्मीर सरकार के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त/सचिव एम. राजू द्वारा जारी आदेश में कहा गया,

'अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. सैयद मकबूल अहमद शाह, एसोसिएट प्रोफेसर (कार्डियोलॉजी) को उनके आचरण की जांच पूरी होने तक जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1956 के नियम 31 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन की अवधि में चिकित्सक को जम्मू स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से संबद्ध किया जाता है।'

'डॉक्टर लोगों की जिंदगी से समझौता न करें'

स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि इस मामले में कई शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई थी। उन्होंने कहा, 'सरकार ने कई शिकायतें मिलने के बाद तथ्यों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की थी। जांच के बाद जब कुछ निष्कर्ष सामने आए, तो हमने उन्हें (डॉक्टर को) निलंबित कर दिया। हमने उनसे अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। आज (शनिवार को) निलंबन का आदेश जारी किया गया है।' उन्होंने आगे कहा, 

'मैं हर डॉक्टर से अपील करती हूं कि लोगों की जिंदगी के साथ कोई समझौता न करें। सरकार आपको वेतन देती है। यह नौकरी लोगों की सेवा और मरीजों की देखभाल के लिए है। सरकार इस मामले पर नजर रख रही है। कार्रवाई की गयी है और जो भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा।'

सरकार ने डॉ. मकबूल के खिलाफ जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1956 के तहत विभागीय कार्यवाही शुरू करने का प्रस्ताव भी किया है।

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