1989 में कश्मीर में आतंकवाद की शुरुआत होने के बाद से यह पहली बार है जब सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के सामने एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पुलिस के मुताबिक अब पूरी कश्मीर घाटी में सिर्फ एक ही स्थानीय आतंकवादी बचा है, जो कुछ विदेशी आतंकियों की मदद से सक्रिय रहने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि दशकों के संघर्ष के बाद स्थानीय स्तर पर आतंकवाद का दायरा लगभग सिमट चुका है।
कौन है घाटी का आखिरी बचा हुआ स्थानीय आतंकवादी?
पुलिस के मुताबिक इस इकलौते बचे हुए स्थानीय आतंकी का नाम लतीफ भट है, जिसकी उम्र महज 22 साल है। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का कमांडर है और दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले का रहने वाला है। इसके अलावा वह कश्मीर रिवोल्यूशन आर्मी (KRA) जैसे संगठनों से भी जुड़ा हुआ है और साल 2025 से घाटी में सक्रिय है।
लतीफ भट कई सनसनीखेज और हाई-प्रोफाइल 'टारगेटेड हमलों' का मुख्य संदिग्ध है। उसने 22 जुलाई 2026 को अनंतनाग में J&K पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या की थी और इसके कुछ ही दिन बाद 31 जुलाई 2026 को कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो बेकसूर प्रवासी मजदूरों को ईंट भट्ठे पर मौत के घाट उतार दिया था। उसकी खतरनाक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने उसकी गिरफ्तारी पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है।
विदेशी आतंकियों की साजिश और स्लीपर सेल को सक्रिय करने की नाकामी
भले ही स्थानीय स्तर पर आतंकियों की संख्या घटकर सिर्फ एक रह गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और आईजीपी सुजीत कुमार का मानना है कि घाटी के ऊंचाई वाले पहाड़ी और जंगली इलाकों में कुछ विदेशी आतंकवादी अब भी छिपे हो सकते हैं। सुरक्षा बल उनकी गतिविधियों पर बहुत बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका कश्मीर में अपने पुराने नेटवर्क को दोबारा जिंदा करने और 'स्लीपर सेल' को एक्टिव करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। वे स्थानीय युवाओं को बरगलाकर आतंकवाद के रास्ते पर लाने की फिराक में रहते हैं, लेकिन आम कश्मीरी युवाओं ने आतंकवाद से पूरी तरह तौबा कर ली है। युवाओं की तरफ से इन नापाक साजिशों को कोई समर्थन नहीं मिल रहा है, जिससे सीमा पार बैठे आकाओं में भारी निराशा है।
सुरक्षा बलों का सख्त एक्शन और ड्रग्स के खिलाफ अभियान
जम्मू-कश्मीर के आईजीपी सुजीत कुमार ने जानकारी दी है कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद-विरोधी अभियान पूरी सख्ती के साथ जारी हैं। इसके साथ ही, ड्रग्स के अवैध कारोबार और आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग पर भी पुलिस और सुरक्षा बल कड़ा प्रहार कर रहे हैं। आम जनता का सहयोग और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से यह साफ है कि कश्मीर अब शांति और विकास की एक नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
यह भी पढ़ें
कश्मीरी पंडित राकेश हांडू को बारामूला पुलिस ने फरीदाबाद से किया गिरफ्तार, जानिए क्या है पूरा मामला