कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई के दो दिन बाद, लेह और करगिल शहरों में रैलियां निकाली गईं। केंद्र सरकार पर लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची लागू करने की मांगों पर जल्द बातचीत फिर शुरू करने को लेकर दबाव बनाने के लिए ये रैलियां आंदोलनकारी संगठनों के आह्वान पर आयोजित की गई। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के प्रदर्शन के आह्वान के मद्देनजर, करगिल और उससे सटे द्रास में भी पूर्ण बंद देखा गया। ये दोनों समूह पिछले पांच सालों से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
कहीं से कोई अप्रिय घटना नहीं
प्रदर्शन के आह्वान के मद्देनजर केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि कहीं से भी कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। सितंबर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद से एलएबी द्वारा यह पहली बड़ी रैली थी।
वांगचुक की रिहाई से पहले हुई बैठक
यह जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत लगभग छह महीने की हिरासत के बाद केंद्र द्वारा रिहा किए जाने के दो दिन बाद हुई है। वांगचुक की रिहाई से पहले एलएबी और केडीए ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ अगले दौर की बातचीत की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था, जैसा कि उच्चाधिकार समिति की बैठक के दौरान वादा किया गया था।
सुरक्षा व्यवस्था का लिया गया जायजा
लद्दाख के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने लेह के सिंगे नामग्याल चौक स्थित रैली स्थल का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर भर में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया। एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे के नेतृत्व में, प्रदर्शनकारियों ने सिंगे नामग्याल चौक से शुरुआत की और लेह पोलो मैदान तक मार्च किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं सहित अन्य ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इसे छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
पिछले साल सितंबर में हुई रैली में मारे गए थे लोग
रैली में शामिल कुछ को उन चार लोगों की तस्वीरें लिए हुए भी देखा गया, जो पिछले साल सितंबर में एलएबी द्वारा प्रायोजित विरोध रैली के हिंसक होने के बाद हुई गोलीबारी में मारे गए थे। राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के मुद्दों पर पिछले पांच सालों से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दो समूहों, एलएबी और केडीए के संयुक्त आह्वान के जवाब में करगिल और उससे सटे द्रास में पूर्ण बंद रहा।
रासुका के तहत वांगचुक को लिया गया था हिरासत में
बता दें कि आंदोलन के एक प्रमुख नेता वांगचुक को सितंबर में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र ने शनिवार को घोषणा की कि वह 'सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को सुगम बनाने' के लिए वांगचुक की हिरासत रद्द कर रहा है।