झारखंड सरकार ने गुरुवार को पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया। अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार को आमतौर पर पेसा अधिनियम के रूप में जाना जाता है। अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने वाला पेसा अधिनियम 1996 में लागू किया गया था। राज्य में अभी इस कानून को लागू किया जाना है।
पंचायती राज विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में झारखंड पंचायत प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) नियम, 2024 के मसौदे पर चर्चा की गई। पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, "राज्य सरकार केंद्रीय कानून की भावना के अनुरूप झारखंड में कानून को लागू करने का हर संभव प्रयास कर रही है।
झारखंड सरकार के कई मंत्री हुए शामिल
गुरुवार को आयोजित कार्यशाला में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भाग लिया, जिन्होंने मसौदे पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उनके सुझावों को अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा। शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, राजस्व और भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। तिर्की ने कहा "पंचायती राज विभाग की यह एक सराहनीय पहल है। हमने सामाजिक संगठनों की चिंताओं को सुना। उनके सुझावों के साथ, राज्य में पेसा अधिनियम के लिए एक मजबूत मसौदा तैयार किया जाएगा।"
कृषि मंत्री ने क्या बताया?
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने एक्स पोस्ट में लिखा "पंचायती राज विभाग के द्वारा पेसा विचार गोष्ठी कार्यशाला में आज अपनी बात रखने का मौका मिला। आज जब पेसा कानून पर राज्य में गंभीर चर्चा हो रही है तब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस कथन को याद करने की जरूरत है। उन्होंने कहा था देश विकास कर रहा है और आगे भी करता रहेगा, लेकिन परंपरा, सभ्यता और संस्कृति धूमिल हो गई, तो इस विकास का कोई फायदा नहीं होगा। आदिवासी समाज के विकास के लिए बजट का प्रावधान होता है, लेकिन उस पैसे का सही उपयोग हो ये सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में दिलीप सिंह भूरिया समिति की रिपोर्ट को अध्ययन करने की जरूरत है। राज्य सरकार और ग्राम सभा के बीच बेहतर समन्वय बनाना होगा। किसका क्या अधिकार हो ये भी सुनिश्चित करना होगा। पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों में आदिवासी समाज के संरक्षण के लिए पहले से कानून के प्रावधान है। इस कानून में आदिवासी और मूलवासी के संरक्षण को तय किया गया है। आदिवासी समाज में सामूहिकता की भावना होती है। आज जरूरत है तो अपने दायित्व और जिम्मेवारी को समझने की। पंचायती राज विभाग ने बेहतर पहल की है और इस पहल का परिणाम भी बेहतर होगा। गोष्ठी में आए तमाम सुझाव को समेटते हुए पेसा कानून में उसे समाहित किया जाएगा। झारखंड में आदिवासी मूलवासी की भावनाओं के अनुरूप PESA कानून को अंतिम रूप सरकार देगी।"
सीएम को सकारात्मक परिणाम की उम्मीद
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम के परिणामों के बारे में आशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "राज्य के लिए सबसे अच्छा क्या है, यह निर्धारित करने के लिए चर्चा आवश्यक है। मुझे उम्मीद है कि इन विचार-विमर्शों से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।" (इनपुट- पीटीआई)