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Janmashtami 2021: आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्‍मोत्‍सव, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Aug 25, 2021 10:28 am IST,  Updated : Aug 30, 2021 07:15 am IST

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। कृष्ण जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र था और सूर्य सिंह राशि में तो चंद्रमा वृषभ राशि में था। इसलिए जब रात में अष्टमी तिथि हो उसी दिन जन्माष्टमी का व्रत करना चाहिए।

Janmashtami 2021: जानिए कब है भगवान श्रीकृष्ण का जन्‍मोत्‍सव, साथ ही जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और- India TV Hindi
Janmashtami 2021: जानिए कब है भगवान श्रीकृष्ण का जन्‍मोत्‍सव, साथ ही जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र Image Source : INDIA TV

आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, कृष्ण जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र था, सूर्य सिंह राशि में तो चंद्रमा वृषभ राशि में था। इसलिए जब रात में अष्टमी तिथि हो उसी दिन जन्माष्टमी का व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को इसे कृष्ण जन्माष्टमी , गोकुलाष्टमी  जैसे नामों  से भी जाना जाता है। जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व। 

इस दिन मंदिरों में मनाई जाएंगी जन्माष्टमी

आचार्य इंदु प्रकाश के मुताबिक, मथुरा, गोकुल और श्री कृष्ण से जुड़े बड़े-बड़े स्थल 31 को जन्माष्टमी मनायेंगे। वास्तव में ये वैष्णव संस्थान गोकुलोत्सव या नन्दोत्सव मनाते हैं, यानी नंद के घर लल्ला भयो है - जाहिर है कि कल के दिन लल्ला के होने की सूचना तभी दी जा सकती है, जब लल्ला आज रात पैदा हो चुके हों, तो फिर से बता दें कि वैष्णव मंदिर या कृष्ण से जुड़े मंदिर 31 अगस्त को जन्माष्टमी मनायेंगे, लेकिन गृहस्थ लोग उससे कंफ्यूजन न हो। उन्हें अपनी जन्माष्टमी का व्रत 30 अगस्त ही करना चाहिए और व्रत का पारण 31 को करना चाहिए।

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जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी तिथि- 30 अगस्त 2021

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 29 अगस्त रात रात 11 बजकर 26 मिनट से शुरू 
अष्टमी तिथि समाप्त: 30 अगस्त देर रात 2 बजे।
रोहिणी नक्षत्र: 30 अगस्त को पूरा दिन पूरी रात पार कर 31 अगस्त सुबह 9 बजकर 44 मिनट तक।

जन्माष्टमी का महत्व
जन्माष्टमी का त्यौहार हिंदुओं द्वारा दुनिया भर में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है, पौराणिक कथाओं के मुताबिक श्री कृष्ण भगवान विष्णु के सबसे शक्तिशाली मानव अवतारों में से एक है। भगवान श्रीकृष्ण हिंदू पौराणिक कथाओं में एक ऐसे भगवान है, जिनके जन्म और मृत्यु के बारे में काफी कुछ लिखा गया है। जब से श्रीकृष्ण ने मानव रूप में धरती पर जन्म लिया, तब से लोगों द्वारा भगवान के पुत्र के रूप में पूजा की जाने लगी।

भगवत गीता में एक लोकप्रिय कथन है- “जब भी बुराई का उत्थान और धर्म की हानि होगी, मैं बुराई को खत्म करने और अच्छाई को बचाने के लिए अवतार लूंगा।” जन्माष्टमी का त्यौहार सद्भावना को बढ़ाने और दुर्भावना को दूर करने को प्रोत्साहित करता है। यह दिन एक पवित्र अवसर के रूप में मनाया जाता है जो एकता और विश्वास का पर्व है।

जन्माष्टमी पूजा विधि

भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि की रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। जिसके कारण यह व्रत सुबह से ही शुरु हो जाता है। दिनभर भगवान हरि की पूजा मंत्रों से करके रोहिणी नक्षत्र के अंत में पारण करें। अर्द्ध रात्रि में जब आज श्रीकृष्ण की पूजा करें। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कामों ने निवृत्त होकर स्नान करें। स्नान करते वक्त इस मंत्र का ध्यान करें-
"ऊं यज्ञाय योगपतये योगेश्रराय योग सम्भावय गोविंदाय नमो नम:"

इसके बाद श्रीहरि की पूजा इस मंत्र के साथ करनी चाहिए
"ऊं यज्ञाय यज्ञेराय यज्ञपतये यज्ञ सम्भवाय गोविंददाय नमों नम:"

अब श्रीकृष्ण के पालने में विराजमान करा कर इस मंत्र के साथ सुलाना चाहिए-
"विश्राय विश्रेक्षाय विश्रपले विश्र सम्भावाय गोविंदाय नमों नम:"

जब आप श्रीहरि को शयन करा चुके हो इसके बाद एक पूजा का चौक और मंडप बनाए और श्रीकृष्ण के साथ रोहिणी और चंद्रमा की भी पूजा करें। उसके बाद शंख में चंदन युक्त जल लेकर अपने घुटनों के बल बैठकर चंद्रमा का अर्द्ध इस मंत्र के साथ करें।

श्री रोदार्णवसम्भुत अनिनेत्रसमुद्धव।
ग्रहाणार्ध्य शशाळेश रोहिणा सहिते मम्।।

इसका मतलब हुआ कि हे सागर से उत्पन्न देव हे अत्रिमुनि के नेत्र से समुभ्छुत हे चंद्र दे!  रोहिणी देवी के साथ मेरे द्वारा दि गए अर्द्ध को आप स्वीकार करें।  इसके बाद नंदननंतर वर्त को महा लक्ष्मी, वसुदेव, नंद, बलराम तथा यशोदा को फल के साथ अर्द्ध दे और प्रार्थना करें कि हे देव जो अनन्त, वामन. शौरि बैकुंठ नाथ पुरुषोत्म, वासुदेव, श्रृषिकेश, माघव, वराह, नरसिंह, दैत्यसूदन, गोविंद, नारायण, अच्युत, त्रिलोकेश, पीताम्बरधारी, नारा.ण चतुर्भुज, शंख चक्र गदाधर, वनमाता से विभूषित नाम लेकर कहे कि जिसे देवकी से बासुदेव ने उत्पन्न किया है जो संसार , ब्राह्मणो की रक्षा क् लिए अवतरित हुए है। उस ब्रह्मारूप भगवान श्री कृष्ण को मै नमन करती हूं। इस तरह भगवान की पूजा के बाद घी-धूप से उनकी आरती करते हुए जयकारा लगाना चाहिए और प्रसाद ग्रहण करने के बाद अपने व्रत को खो ले।

खीरे का महत्व

जन्माष्टमी पर लोग श्रीकृष्ण को खीरा चढ़ाते हैं, माना जाता है कि नंदलाल खीरे से काफी प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सारे संकट हर लेते हैं। इस दिन ऐसा खीरा लाया जाता है जिसमें थोड़ा डंठल और पत्तियां भी होनी चाहिए।

मान्यताओं के अनुसार, जन्मोत्सव के समय इसे काटना शुभ माना जाता है। अब आपके दिमाग में घूम रहा होगा कि आखिर खीरे को काटना क्यों शुभ माना जाता है। हम आपको बता दें कि जिस तरह एक मां की कोख से बच्चे के जन्म के बाद मां से अलग करने के लिए 'गर्भनाल' को काटा जाता है। उसी तरह खीरे और उससे जुड़े डंठल को 'गर्भनाल' माना काटा जाता है जोकि कृष्ण को मां देवकी से अलग करने के लिए काटे जाने का प्रतीक है।

ऐसे करें नाल छेदन
खीरे को काटने की प्रकिया को नाल छेदन के नाम से जाना है। इस दिन खीरा लाकर कान्हा के झूले या फिर भगवान कृष्ण के पास रख दें। जैसे ही भगवान कृष्ण का जन्म हो, उसके तुरंत बाद एक सिक्के की मदद से खीरा औऱ डंठल को बीच से काट दें। इसके बाद शंख जरूर बजाएं।

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