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भोपाल गैस त्रासदी का काला चैप्टर खत्म, यूनियन कार्बाइड कारखाने का पूरा 337 टन कचरा खाक

 Published : Jun 30, 2025 02:44 pm IST,  Updated : Jun 30, 2025 02:44 pm IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर पीथमपुर के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने का बचा 307 टन कचरा खाक हो गया है। इसके साथ ही, भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने का कुल 337 टन कचरा भस्म हो गया है।

337 टन कचरे को धार जिले...- India TV Hindi
337 टन कचरे को धार जिले में पीथमपुर के संयंत्र में 2 जनवरी को पहुंचाया गया था। Image Source : PTI

इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर पीथमपुर के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने का बचा 307 टन कचरा खाक हो गया है। इसके साथ ही, भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने का कुल 337 टन कचरा भस्म हो गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि धार जिले के संयंत्र में तीन परीक्षणों के दौरान यूनियन कार्बाइड कारखाने का 30 टन कचरा पहले ही जलाया जा चुका है।

5 मई को शुरू हुआ था प्रोसेस, 30 जून की रात को खत्म

भोपाल में 2 और 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में गिना जाता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि पीथमपुर में एक प्राइवेट कंपनी द्वारा संचालित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के बचे 307 टन कचरे को भस्म किए जाने की प्रक्रिया 5 मई को देर शाम 7 बजकर 45 मिनट के आस-पास शुरू हुई थी जो रविवार (29 जून) और सोमवार (30 जून) की दरमियानी रात 01:00 बजे समाप्त हो गई।

270 किलोग्राम प्रति घंटे की अधिकतम दर से जलाया कचरा

उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट के 27 मार्च को जारी निर्देश के मुताबिक यूनियन कार्बाइड के बचे कचरे को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में पीथमपुर के संयंत्र में 270 किलोग्राम प्रति घंटे की अधिकतम दर से जलाया गया। द्विवेदी ने बताया कि इस कचरे को भस्म किए जाने के दौरान पीथमपुर के संयंत्र से अलग-अलग गैसों और कणों के उत्सर्जन की एक ऑनलाइन तंत्र द्वारा वास्तविक समय में निगरानी की गई। उन्होंने दावा किया, ‘‘इस संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने का कचरा जलाए जाने के दौरान तमाम उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर पाए गए। कचरा भस्म किए जाने के दौरान आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर किसी विपरीत असर के बारे में हमारे पास कोई सूचना नहीं है।’’

bhopal gas tragedy
Image Source : FILE PHOTOखाक हुआ भोपाल गैस त्रासदी का नामोनिशान।

अवशेषों को जमीन में दफनाने के लैंडफिल सेल का निर्माण

द्विवेदी के मुताबिक, यूनियन कार्बाइड कारखाने का कुल 337 टन कचरा जलने के बाद निकली राख और अन्य अवशेषों को बोरों में सुरक्षित तरीके से भरकर संयंत्र के ‘लीक-प्रूफ स्टोरेज शेड’ में रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन अवशेषों को जमीन में दफनाने के लिए तय वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत विशेष सुविधा (लैंडफिल सेल) का निर्माण कराया जा रहा है और यह काम नवंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। द्विवेदी ने कहा, ‘‘सबकुछ ठीक रहा, तो दिसंबर तक इन अवशेषों का भी निपटारा कर दिया जाएगा। इससे पहले, इन अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा ताकि इन्हें दफनाए जाने से आबो-हवा को कोई नुकसान न पहुंचे।’’ 

कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का कोई अस्तित्व नहीं था

भोपाल में बंद पड़े यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे को सूबे की राजधानी से करीब 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर के संयंत्र में 2 जनवरी को पहुंचाया गया था। इस संयंत्र में तीन परीक्षणों के दौरान कुल 30 टन कचरा जलाया गया था। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से हाई कोर्ट को विश्लेषण रिपोर्ट के हवाले से बताया गया था कि क्रमशः 135 किलोग्राम प्रति घंटा, 180 किलोग्राम प्रति घंटा और 270 किलोग्राम प्रति घंटा की दरों पर किए गए तीनों परीक्षणों के दौरान उत्सर्जन तय मानकों के भीतर पाए गए। प्रदेश सरकार के मुताबिक, यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और "अर्द्ध प्रसंस्कृत" अवशेष शामिल थे।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव पहले ही ‘‘लगभग नगण्य’’ हो चुका था। बोर्ड के मुताबिक, फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का कोई अस्तित्व नहीं था और इसमें किसी तरह के रेडियोधर्मी कण भी नहीं थे। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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