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अस्पताल पहुंचने से पहले एंबुलेंस में खत्म हुई ऑक्सीजन, बेटे ने माता-पिता की गोद में तोड़ा दम; मंत्री ने दिए जांच के आदेश

 Reported By: Anurag Amitabh Written By: Mangal Yadav
 Published : Aug 01, 2026 04:01 pm IST,  Updated : Aug 01, 2026 04:23 pm IST

जानकारी के अनुसार, मंडला जिले के सुनहरा माल गांव का रहने वाला 21 वर्षीय अजीत बरया पिछले कई महीनों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था।

ऑक्सीजन खत्म जिंदगी खत्म- India TV Hindi
ऑक्सीजन खत्म जिंदगी खत्म Image Source : REPORTER

मध्य प्रदेश के मंडला से एक ऐसी खबर जो सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला जहां सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, लेकिन आरोप है कि यहां एक 21 वर्षीय युवक की जिंदगी सिस्टम की लापरवाही के कारण खत्म हो गई।

परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस देर से पहुंची। डॉक्टर की अनुमति का बहाना बनाकर रास्ते में ऑक्सीजन नहीं दी गई और जब ऑक्सीजन लगी भी तो जिला अस्पताल पहुंचने से पहले सिलेंडर ही खाली हो गया। अगर ये आरोप सही हैं तो सवाल सिर्फ एक युवक की मौत का नहीं बल्कि उस पूरे सिस्टम का है जिसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है। 

किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था लड़का

जानकारी के अनुसार, मंडला जिले के सुनहरा माल गांव का रहने वाला 21 वर्षीय अजीत बरया पिछले कई महीनों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। जिला अस्पताल में उसका नियमित डायलिसिस चल रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार अस्पताल से डायलिसिस का समय बदलने और बेहतर इलाज की मांग की लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। परिवार का दावा है कि अगर समय पर इलाज मिलता तो शायद आज अजीत जिंदा होता।

परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप

 
बीमारी बढ़ी सांसें उखड़ने लगीं और परिवार ने 108 एंबुलेंस को फोन किया। परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद पहुंची। इतना ही नहीं उनका आरोप है कि मौके पर मौजूद स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर ऑक्सीजन लगाने से इनकार कर दिया। सवाल ये है कि जब मरीज की हालत गंभीर थी तो क्या प्राथमिक उपचार देना जरूरी नहीं था। क्या नियमों का हवाला देकर एक मरीज की जिंदगी को इंतजार कराया गया।

परिजनों के मुताबिक मरीज को सीधे जिला अस्पताल ले जाने के बजाय पहले बम्हनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने तत्काल ऑक्सीजन लगाने और जिला अस्पताल रेफर करने के निर्देश दिए लेकिन आरोप है कि मंडला पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया जैसे ही ऑक्सीजन बंद हुई वैसे ही अजीत की सांसें भी टूटने लगीं। जिला अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी मौत हो गई। सवाल है क्या बिना पर्याप्त ऑक्सीजन के एंबुलेंस सड़क पर दौड़ रही थी। क्या बैकअप सिलेंडर मौजूद नहीं था। क्या किसी ने एंबुलेंस रवाना होने से पहले सिलेंडर की जांच नहीं की। 

मंत्री ने दिए जांच के आदेश

अब सबसे बड़ा सवाल यह सिर्फ एक युवक की मौत का मामला नहीं  बल्कि मंडला की स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल हैं। मंडला प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री और पीएचई मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। ऐसे में विपक्ष और स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब मंत्री के अपने जिले में ही गंभीर मरीजों को समय पर ऑक्सीजन और बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मिलने पर सवाल उठ रहे हैं तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है। क्या जिला स्वास्थ्य प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। क्या सरकार के दावों के अनुरूप जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। अगर व्यवस्था में कहीं लापरवाही हुई है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। 

यह पहला मौका नहीं है इससे पहले भी मंडला में एंबुलेंस की देरी डॉक्टरों की कमी रेफर सिस्टम और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हर बार जांच के आदेश दिए जाते हैं और कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस बार भी स्वास्थ्य विभाग जांच की बात कर रहा है लेकिन क्या इस जांच से एक परिवार को उसका बेटा वापस मिल जाएगा या फिर ये भी सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाएगी। 

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