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'पुष्पा फिल्म में जैसे तस्कर, MLA, अफसर सिंडिकेट चलाते हैं वैसे MP में स्थिति', जंगल कटाई पर हाई कोर्ट की टिप्पणी

 Edited By: Mangal Yadav
 Published : Mar 05, 2025 08:33 pm IST,  Updated : Mar 05, 2025 09:30 pm IST

मध्य प्रदेश में जंगल की कटाई पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार के 24 सितंबर 2019 के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है। जिसमें 53 प्रकार के पेड़ों को अनुमति के दायरे से बाहर किया गया था।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट- India TV Hindi
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट Image Source : INDIA TV

जबलपुरः मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश में जंगल कटाई की नीतियों पर तल्ख़ टिप्पणी करते हुए सरकार की जमकर फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने पुष्पा फिल्म  दिखाए गए सिंडिकेट का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे 'पुष्पा' मूवी में तस्कर, विधायक, अफसर सिंडिकेट चलाते हैं वैसे ही मध्य प्रदेश में स्थिति है। 

हाई कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

लार्जर बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि फिल्म पुष्पा में व्यापारियों व सिंडिकेट को उजागर किया है। जो आंध्र प्रदेश के शेषाचलम के घने हरे-भरे जंगलों में लाल चंदन के अवैध परिवहन, व्यापार और बिक्री में लगे हुए हैं। तस्करों और व्यापारियों का सिंडिकेट इतना प्रभाव और दबदबा बनाने लगता है कि पुलिस ,वन विभाग, नीति निर्माताओं और अंततः विधायकों तक शासन का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं रह जाता। यह दर्शाता है कि कैसे वनोपज के अवैध व्यापार और परिवहन का राक्षस और माफिया घने जंगलों में घुस सकता है। राज्य मशीनरी के साथ मिलीभगत करके जंगल की प्राकृतिक संपदा को लूट सकता है। कार्यपालिका ‘वन उपज’ के ऐसे विक्रेताओं के प्रभाव और दबदबे के आगे झुक जाती है।

दस पुत्र एक पेड़ के बराबरः हाईकोर्ट 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की लार्जर बेंच ने अपने अहम आदेश में कहा है कि एक जलाशय दस कुंए के बराबर है। दस जलाशय एक पुत्र के बराबर हैं और दस पुत्र एक पेड़ के बराबर है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत, जस्टिस एस ए धर्माधिकारी और जस्टिस विवेक जैन की लार्जर बेंच ने सरकार के द्वारा इस संबंध में जारी संशोधित अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। साथ ही सुनवाई को दौरान कोर्ट ने एमपी में पुष्पा सिंडिकेट का जिक्र किया है। 

सरकार का 24 सितंबर 2019 का नोटिफिकेशन रद्द

हाई कोर्ट की बड़ी बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार को झटका देते हुए सरकार के 24 सितंबर 2019 के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया। नोटिफिकेशन में 53 प्रकार के पेड़ों की कटाई और परिवहन को अनुमति के दायरे से बाहर किया गया था।

लार्जर बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि साल 2015 में जारी विवादित अधिसूचना और साल 2017 में किए गए संशोधन वन अधिनियम, 1927 की धारा 41(1), (2) और (3) के प्रावधानों के विपरीत हैं। इसके अलावा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 48-ए का उल्लंघन करते हैं। लार्जर बेंच ने विवादित अधिसूचना और उसमें किए गए संशोधन को निरस्त कर दिया। साथ ही अपने आदेश में कहा है कि ट्रांजिट पास नियम, 2000 छूट प्राप्त सभी वृक्ष की प्रजातियों पर तत्काल प्रभाव से लागू की जाए। 

हाई कोर्ट ने सरकार को दिया ये आदेश

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश देते हुए कहा कि शासन की सभी 52 वैबसाइट से इस आदेश का सरकार प्रचार प्रसार करवाये। गोदामों में रखी लकड़ियों का व्यापार रोकने के लिए स्टॉक की जांच भी सरकार करवाए।

रिपोर्ट- देबजीत देब, जबलपुर

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