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महाकाल मंदिर के सोने-चांदी के दान पर महापौर का बड़ा कदम, कलेक्टर को पत्र लिख की फिजिकल वेरिफिकेशन की मांग

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Jul 01, 2026 07:59 pm IST,  Updated : Jul 01, 2026 07:59 pm IST

उज्जैन के महाकाल मंदिर में चढ़ाए जा रहे दान के लिए अब फिजिकल वेरिफिकेशन कराने की बात महापौर ने रखी है। उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिख सोने-चांदी के दान का वेरिफिकेशन कराने के लिए मांग की।

Ujjain- India TV Hindi
कैश की गिनती। Image Source : REPORTER INPUT

विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की सुरक्षा और उनके सही इस्तेमाल को लेकर उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने मंदिर में अर्पित की जाने वाली कीमती दान सामग्री की व्यवस्थाओं पर ध्यान आकर्षित करते हुए जिला कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से महापौर ने दान में मिले स्वर्ण-रजत आभूषणों का पूरी पारदर्शिता के साथ फिजिकल वेरिफिकेशन कराने और उन्हें मंदिर के कार्यों में उपयोगी बनाने की मांग की है।

पूर्व में बनी समिति की अधूरी प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने पर जोर

महापौर मुकेश टटवाल ने 29 जून को भेजे गए अपने पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि भगवान महाकाल के प्रति अगाध आस्था के कारण श्रद्धालु हर साल भारी मात्रा में सोना, चांदी, अन्य कीमती धातुएं और नकद राशि मंदिर में भेंट करते हैं। इस विशाल जन-आस्था को देखते हुए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि दान में आई हर सामग्री का रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित हो। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में मंदिर प्रबंध समिति के माध्यम से दान सामग्री के मूल्यांकन, सत्यापन और उसके उचित उपयोग को लेकर एक विशेष समिति का गठन किया गया था, जिसमें वे खुद भी शामिल थे। उस दौरान तत्कालीन कलेक्टर द्वारा सामग्री की सूची भी उपलब्ध कराई गई थी और इसे लेकर बैठकें भी हुईं, लेकिन उसके बाद चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के कारण यह पूरी प्रक्रिया बीच में ही रुक गई और योजना पर पूरी तरह अमल नहीं हो सका।

व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए पारदर्शिता की जरूरत

महापौर ने साफ किया कि वर्तमान में महाकाल मंदिर में आने वाले दान का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्थाएं ठीक ढंग से चल रही हैं, लेकिन रुकी हुई प्रक्रिया को दोबारा गति देना समय की मांग है। इस विशेष समिति का मुख्य उद्देश्य यही था कि मंदिर के खजाने में जमा सोना, चांदी, पीतल और अन्य सामग्रियों की सही स्थिति जांची जाए और यह योजना बनाई जाए कि इस भंडार का मंदिर के विकास या जनहित में बेहतर उपयोग कैसे किया जा सकता है। अब पत्र लिखकर इसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का आग्रह किया गया है ताकि श्रद्धालुओं के दान का पूरी ईमानदारी के साथ सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

रिपोर्ट- प्रेम डोडिया

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