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'कटोरी उर्फ चमेली' का अंतिम संस्कार, बकरी की मौत से टूट गया परिवार, दाह संस्कार से लेकर तेरहवीं का भोज तक कराया

 Reported By: Anurag Amitabh Written By: Amar Deep
 Published : Aug 15, 2026 09:34 pm IST,  Updated : Aug 15, 2026 09:34 pm IST

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक बकरी की मौत के बाद परिजनों ने इंसानों की तरह उसके सभी संस्कारों को पूरा किया। बकरी का दाह संस्कार किया गया, उसकी अस्थियों को गंगा में विसर्जित किया गया और फिर तेरहवीं का भोज भी दिया गया।

बकरी का कराया गया अंतिम संस्कार।- India TV Hindi
बकरी का कराया गया अंतिम संस्कार। Image Source : REPORTER INPUT

विदिशा: जिले के सिरोंज इलाके से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां इंसान और जानवर के रिश्ते की अनोखी मिसाल देखने को मिली। यहां एक बकरी की मौत के बाद बाकायदा उसका अंतिम संस्कार किया गया। इतना ही नहीं उसकी अस्थियों को गंगा में विजर्सित किया गया और फिर बकरी की मौत के बाद उसकी तेरहवीं भी की गई। इसके लिए बाकायदा शोक संदेश छपवाया गया और लोगों को बुलाकर भोज भी दिया गया। फिलहाल बकरी की तेरहवीं का यह मामला इलाके में काफी चर्चा में है। वहीं परिजनों का कहना है कि उन्होंने बकरी को अपने बच्चे की तरह पाला था।

बेटी की तरह किया बकरी का पालन-पोषण

जानकारी के मुताबिक सिरोंज इलाके के भवानी नगर मोहल्ले में रहने वाले किसान नवल सिंह मालवीय ने एक बकरी पाल रखी थी। हालांकि बीते दिनों उनकी बकरी की मौत हो गई। बकरी की मौत के बाद किसान ने अपनी उसका अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक सब कुछ इंसानों की तरह किया। नवल सिंह की बकरी का नाम "कटोरी उर्फ चमेली" था। बकरी की मौत बीते 3 अगस्त को हो गई थी। बकरी की मौत पर नवल सिंह मालवीय का कहना है कि उन्होंने उसे 20 साल तक पाला। वो बकरी उनके लिए बेटी जैसी थी। वह घर में पलंग पर सोती थी और हमेशा परिवार के साथ रहती थी। उन्होंने कहा, "जब कटोरी चल बसी तो लगा घर का ही कोई सदस्य चला गया।"

शोक पत्र छपवा कर रिश्तेदारों को कराया भोज।
Image Source : REPORTER INPUTशोक पत्र छपवा कर रिश्तेदारों को कराया भोज।

पूरे विधि-विधान से हुआ अंतिम संस्कार

बकरी की मौत के बाद नवल सिंह मालवीय ने प्रशासन से अनुमति लेकर उसका दाह संस्कार किया। इसके बाद उन्होंने अस्थियां लेकर गंगा में विसर्जित करने प्रयागराज गए। इन सभी क्रियाओं के बाद नवल सिंह ने 15 अगस्त को तेरहवीं का आयोजन किया। इतना ही नहीं, परिवार ने बकरी के तेरहवीं कार्यक्रम के लिए बाकायदा शोक पत्रिका छपवाकर रिश्तेदारों और पड़ोसियों को न्योता भेजा था। उसकी तेहरवीं में करीब 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। कुल मिलाकर आज के समय में जब कई बार बुजुर्गों तक को अंतिम समय में परिवार का साथ नहीं मिलता, ऐसे में एक पालतू पशु का इतने सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना लोगों को छू गया। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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