1. Hindi News
  2. मध्य-प्रदेश
  3. MP के गोटमार मेले में 834 घायल, एक के पैर की हड्डी टूटी; परंपरा के नाम पर दोनों तरफ से बरस रहे पत्थर

MP के गोटमार मेले में 834 घायल, एक के पैर की हड्डी टूटी; परंपरा के नाम पर दोनों तरफ से बरस रहे पत्थर

 Reported By: Anurag Amitabh,  Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 11, 2026 07:20 pm IST,  Updated : Sep 11, 2026 07:20 pm IST

मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में परंपरागत गोटमार मेले में 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। जाम नदी में पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के खिलाड़ियों के बीच पत्थरबाजी जारी है। सदियों पुरानी इस परंपरा के दौरान सुरक्षा के लिए 700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

gotmar mela- India TV Hindi
गोटमार मेले में पत्थरबाजी। Image Source : REPORTER INPUT

मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में आयोजित प्रसिद्ध गोटमार मेले में परंपरा के नाम पर आज हुई पत्थरबाजी ने एक बार फिर इसकी खूनी तस्वीर सामने ला दी। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थर बरसाए गए, जिसमें 834 लोग घायल हो गए। पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई।

घायलों को उपचार के लिए अस्पताल और स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचाया गया। अचानक शुरू हुई पत्थरों की बौछार के बीच कई लोगों को बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।

झंडे पर कब्जे को लेकर होता है मुकाबला

गोटमार मेले की परंपरा में दोनों पक्षों के बीच झंडे पर कब्जे को लेकर मुकाबला होता है। नदी के बीच लगे झंडे को हासिल करने के लिए खिलाड़ी पत्थर चलाते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते रहे हैं और कई बार मौतें भी हो चुकी हैं। गोटमार मेले में घायलों के इलाज के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है, जबकि 22 एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं। घायलों को जरूरत के मुताबिक प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा जा रहा है।

gotmar mela
Image Source : REPORTER INPUTगोटमार मेला।

सुरक्षा के लिए 700 पुलिसकर्मी तैनात

सदियों पुरानी इस परंपरा के दौरान सुरक्षा के लिए 700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेला क्षेत्र और आसपास 10 CCTV कैमरों और 3 ड्रोन से निगरानी की जा रही है। गोटमार में 1955 से 2025 तक पत्थरबाजी के दौरान 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

परंपरा के नाम पर बरसते हैं मौत के पत्थर

दरअसल, पांढुर्णा और सावरगांव के बीच जाम नदी पर पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले में हजारों लोग शामिल होते हैं। मां चंडिका के पूजन और दर्शन के बाद खिलाड़ी गोटमार में हिस्सा लेते हैं। वर्ष 1955 से 2025 तक गोटमार में पत्थरबाजी के दौरान 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। प्रशासन हर साल इस परंपरा को रोकने और पत्थरबाजी की जगह सुरक्षित तरीके अपनाने की कोशिश करता है, लेकिन परंपरा के नाम पर होने वाला यह आयोजन पूरी तरह बंद नहीं हो पाया। कभी रबर बॉल से गोटमार कराने का प्रयास भी हुआ, लेकिन कुछ ही देर में रबर बॉल गायब हुए और पत्थरों की बरसात फिर शुरू हो गई।

देखें वीडियो-

मेले की शुरुआत के पीछे वजह क्या?

इस मेले की शुरुआत को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। एक कहानी में भोसला राजाओं के सैनिकों के युद्धाभ्यास को इसकी शुरुआत से जोड़ा जाता है, जबकि दूसरी लोकप्रिय मान्यता पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। कहा जाता है कि प्रेमी युगल को रोकने के दौरान दोनों पक्षों में पत्थरबाजी हुई और इसी घटना के बाद गोटमार की परंपरा शुरू हुई। हालांकि बुजुर्गों का कहना है कि समय के साथ इस परंपरा का स्वरूप बदल गया है। गोफन, अवैध शराब और बढ़ती आक्रामकता ने मेले को पहले से ज्यादा खतरनाक बना दिया है।

यह भी पढ़ें-

रायसेन जेल में गोलीकांड का लाइव वीडियो आया सामने, प्रहरी पर फायरिंग के बाद सिर पर किए वार; आंखों में मिर्च डाली

इंदौर में हंगामा, युवक ने एडिशनल DCP को दिया धक्का, जमीन पर गिरे साहब, सामने आया VIDEO

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। मध्य-प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।