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पीएम नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष: आस्था-परंपरा-विकास का अनूठा संगम बना नमो-मोहन का MP मॉडल

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Jun 17, 2026 06:22 pm IST,  Updated : Jun 17, 2026 06:22 pm IST

मध्य प्रदेश में बीते 12 सालों में खूब विकास हुआ है। इसमें केंद्र की मोदी सरकार ने काफी सहयोग दिया है। इस दौरान धार्मिक पर्यटन से लेकर सांस्कृतिक संरक्षण के कई कार्य हुए हैं।

PM Modi, Mohan Yadav- India TV Hindi
नमो-मोहन का MP मॉडल हिट Image Source : NARENDRA MODI-MOHAN YADAV/X

भोपाल: विरासत से विकास, यह वह वाक्य है जो आज बदलते भारत की पहचान बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल से इसका गहरा संबंध है। प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यकाल के 12 सफलतम वर्ष पूर्ण कर चुके हैं और उन्होंने इन वर्षों में 'विरासत से विकास' मंत्र पर ही विकसित भारत का सपना देखा है। उनके इस वाक्य की छाया में मध्य प्रदेश भी उत्तरोत्तर प्रगति की राह पर दौड़ रहा है। मध्य प्रदेश अपने प्राचीन मंदिरों, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परम्पराओं के लिए देश में जाना जाता है। 

केन्द्र की मोदी सरकार के सहयोग से यह राज्य बीते 12 वर्षों में विकास के परिवर्तनों का बड़ा साक्षी बना है। केंद्र सरकार की मदद से मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन से लेकर सांस्कृतिक संरक्षण के कई कार्य हुए हैं। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार प्रदेश में धार्मिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास पर विशेष जोर दे रही है। मोहन सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक संरक्षण के संकल्प को मध्य प्रदेश में पूरा करने की दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।⁠ 

भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण : 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमोत्सव के विशेष अवसर पर विश्व की पहली “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’’ का शुभारंभ कर भारतीय काल गणना परम्परा का साक्षात्कार पूरी दुनिया से कराया जिसके बाद शासकीय कैलेण्डर में विक्रम संवत अंकित करना प्रारंभ किया गया। 

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का जीवंत प्रतीक है। यह न केवल भारत की प्राचीन समय गणना पद्धति को नया जीवन प्रदान करती है, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर एक नया आयाम प्रदान करती है। यह घड़ी भारत के सभी प्रमुख मंदिरों से भी जुड़ी हुई है जिससे यह धार्मिक और सांस्कृतिक अभ्युदय की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। 

यह घड़ी न सिर्फ समय बताती है, बल्कि सूर्योदय, पंचांग, मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति जैसी सूचनाएं भी देती है। मध्य प्रदेश सरकार की पहल पर काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ने एक बार फिर देश का ध्यान भारतीय समय-गणना की प्राचीन परंपरा की ओर खींचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों वाराणसी दौरे के दौरान इस विशिष्ट घड़ी का अवलोकन किया और प्रदेश सरकार की पहल को सराहा। मोहन  सरकार की पहल पर उज्जैन से शुरू हुआ यह सफ़र अब देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच गया है। काशी में इसकी स्थापना को भारतीय सांस्कृतिक चेतना और वैज्ञानिक सोच के संगम के रूप में देखा जा रहा है।   

एकात्म धाम: एकात्मता का दिव्य केंद्र

मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तहत एकात्म धाम का इन दिनों विकास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अद्वैत वेदांत को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना, सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना और मानवता में एकत्व का भाव जगाना है। एकात्मधाम के अंतर्गत दूसरे चरण में 2195 करोड़ रुपये की लागत से आचार्य शंकर के जीवन और दर्शन पर केंद्रित अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आचार्य शंकर के जीवन, उनके भाष्यों, पांडुलिपियों, दर्शन एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित व प्रदर्शित करना है। 

परियोजना में संग्रहालय, शोध-केंद्र, शैक्षिक सुविधाएं तथा तीर्थ और सांस्कृतिक पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का विकास शामिल करने की रूपरेखा रखी गई है, जिससे न केवल आध्यात्मिक-अध्ययन को बल मिलेगा बल्कि स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। मोहन सरकार द्वारा इसे महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। 2028 तक मुख्य निर्माण कार्य पूरे होने की उम्मीद है।

सनातन की समृद्ध परम्पराएं फिर से हुई जीवंत

डॉ मोहन यादव की सरकार प्रदेश की समृद्ध परंपराओं को जीवंत रखते हुए नए आयाम जोड़ रही है। अब प्रदेश में हर वर्ष राज्य स्थापना दिवस पर भव्य सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिसमें लोक कलाएं, नाट्य, संगीत और विरासत को बढ़ावा मिलता है। गोवर्धन पूजा जैसे कार्यक्रम सनातन की परंपरा को पुनर्जीवित करते हैं। महर्षि सांदीपनी विद्यालयों का नामकरण और सनातन मूल्यों पर आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन देने की दिशा में सरकार निरंतरता के साथ कार्य कर रही है। वीरांगना रानी दुर्गावती की 500 वीं जयंती पर मोहन सरकार ने  2024 में  कैबिनेट बैठक का आयोजन किया वहीं अहिल्याबाई की 300 वीं  जयंती पर कैबिनेट बैठक के साथ ही जनजातीय राजा भभूत सिंहकी स्मृति में एक भव्य कैबिनेट बैठक आयोजित कर अपने विरासत से विकास के संकल्प को मजबूती प्रदान की है। होली, दिवाली, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, विजयादशमी, गीता जयंती जैसे त्योहारों का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत  करने की दिशा में मोहन सरकार के सधे कदम को दर्शाता है। 

तेजी से बढ़ रहा स्थानीय रोजगार

एमपी में धार्मिक पर्यटन के लगातार हुए विस्तार से स्थानीय रोजगार तेजी से बढ़ रहा है। आस्था से अर्थव्यवस्था का मॉडल मध्य प्रदेश को 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर तेजी से ले जा रहा है। एमपी में  धार्मिक पर्यटन अब  केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मजबूत संकल्पशक्ति से मां शिप्रा की परिक्रमा और गंगा दशहरा सरीखे आयोजनों  को भी अब बड़े स्तर पर जनसमर्थन मिल रहा है। 

मोहन का पूरा विजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक उत्थान के संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रयास है, जिसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों के लिए पर्यटन आधारित रोजगार पैदा करना और प्रदेश की सनातन विरासत को विकास के साथ संरक्षित करना है।

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