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किस्मत हो तो ऐसी! पन्ना के आदिवासी परिवार पर दोबारा मेहरबान हुई धरती, दूसरी बार मिला लाखों का हीरो

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Jun 29, 2026 03:05 pm IST,  Updated : Jun 29, 2026 03:05 pm IST

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में आदिवासी परिवार की किस्मत चमक गई है। इस परिवार को दूसरी बार हीरा मिला है, वो भी लाखों का। दो साल पहले भी इस फैमिली को हीरा मिला था।

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हीरा। Image Source : REPORTER INPUT

मध्य प्रदेश के पन्ना की धरती को यूं ही रत्नगर्भा नहीं कहा जाता। यहां कभी-कभी मिट्टी के नीचे छिपा एक पत्थर किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल देता है। ऐसा ही एक वाकया फिर सामने आया है, जहां एक गरीब आदिवासी परिवार सहित 3 परिवारो की किस्मत दूसरी बार चमक उठी है। दो साल पहले 93 लाख रुपये का हीरा मिलने के बाद अब उसी परिवार को छोटे बेटे को 11.19 कैरेट का जेम्स क्वालिटी का हीरा मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी जा रही है। खास बात यह है कि यह सफलता किसी संयोग से नहीं, बल्कि महीनों की लगातार मेहनत का नतीजा है।

महीनों की कड़ी मेहनत के बाद चमकी किस्मत

पन्ना जिले के अहिरगवां क्षेत्र की एक चुटु सरकार की निजी भूमि पर  राकेश गौड़ आदिवासी ने अपने भाइयों और  3 अन्य गांव के लोगो के साथ अप्रैल महीने में हीरे की खदान का पट्टा लिया था। करीब दो महीने तक रोजाना खुदाई और छंटाई के बाद सोमवार को उनकी मेहनत रंग लाई और 11.19 कैरेट का चमचमाता जेम्स क्वालिटी का हीरा मिला। परिवार ने नियमानुसार हीरे को तुरंत हीरा कार्यालय में जमा करा दिया, जहां जांच के बाद इसे आगामी शासकीय नीलामी में शामिल किया जाएगा। अनुमान है कि नीलामी में इस हीरे की कीमत करीब 40 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

2024 में भी मिला था 93 लाख का हीरा

इस परिवार के लिए यह पहली बड़ी सौगात नहीं है। वर्ष 2024 में भी इन्हें 19.22 कैरेट का हीरा मिला था, जिसकी सरकारी नीलामी में 93 लाख रुपये कीमत मिली थी। लेकिन उस सफलता के बाद भी परिवार ने मेहनत का रास्ता नहीं छोड़ा। एक बार फिर उसी भरोसे और उम्मीद के साथ खदान लगाई गई और किस्मत ने दोबारा उनका साथ दिया। राकेश आदिवासी का कहना है कि इस हीरे से मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा फिर नई खदान लगाने में लगाया जाएगा, क्योंकि पन्ना की मिट्टी पर उनका भरोसा आज भी कायम है।

उम्मीद और संघर्ष की मिसाल

पन्ना का हीरा उद्योग सिर्फ चमकते पत्थरों की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों मजदूर परिवारों की उम्मीद भी है, जो हर दिन मिट्टी में अपनी किस्मत तलाशते हैं। अधिकांश लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है, लेकिन कभी-कभी यही धरती किसी मेहनतकश परिवार की जिंदगी बदल देती है। राकेश आदिवासी का परिवार आज उसी उम्मीद और संघर्ष की नई मिसाल बन गया है। पन्ना से एक बार फिर यह संदेश निकला है कि यहां हीरे सिर्फ जमीन से नहीं निकलते, बल्कि धैर्य, मेहनत और उम्मीद की लंबी यात्रा के बाद मिलते हैं और जब किस्मत साथ देती है तो एक साधारण मजदूर परिवार रातों-रात फिर से लखपति बन जाता है।

रिपोर्ट- अमित सिंह

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