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5 से 10 लाख रुपये में बनती थी डिग्री-मार्कशीट! सरकारी नौकरी, एडमिशन और प्रमोशन में होती थी इस्तेमाल, 1 गिरफ्तार

 Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Aug 27, 2026 07:51 am IST,  Updated : Aug 27, 2026 07:57 am IST

कानपुर सहित कर्नाटक के एक विश्वविद्यालय के नाम से तैयार किए गए प्रमाणपत्र शामिल हैं। इन दस्तावेजों में डिग्री, सेमेस्टर मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट के साथ फर्जी मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया था।

फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले गैंग का भंडाफोड़- India TV Hindi
फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले गैंग का भंडाफोड़ Image Source : REPORTER INPUT

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में नामी विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी डिग्री, मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कर लाखों रुपये कमाने वाले रैकेट का दुर्गापुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान अलग-अलग विश्वविद्यालयों के नाम से तैयार बड़ी संख्या में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, इन दस्तावेजों का इस्तेमाल सरकारी नौकरी, कॉलेज में एडमिशन और नौकरी में प्रमोशन के लिए किया जाता था।

मामले में पुलिस ने वैभव सोनुले को गिरफ्तार किया है, जबकि कथित तौर पर रैकेट का मुख्य आरोपी परिमल बाबुराव गौरकर फरार है। पुलिस के अनुसार, आरोपी जरूरत के हिसाब से फर्जी डिग्री और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार कर उपलब्ध कराते थे और इसके बदले 5 से 10 लाख रुपये तक वसूलते थे।

पड़ोसी के पास रखी थैली से खुला राज

पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी परिमल गौरकर ने अपने पड़ोसी वैभव गणपतराव माशीरकर के पास कार में रखी एक कपड़े की थैली सुरक्षित रखने के लिए दी थी। कुछ समय बाद जब गौरकर थैली में रखे दस्तावेज लेने पहुंचा तो माशीरकर को शक हुआ और उसने कागजात के बारे में पूछताछ की।

बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान गौरकर ने कथित तौर पर बताया कि इन दस्तावेजों को सरकारी नौकरी, कॉलेज एडमिशन और प्रमोशन की जरूरत के मुताबिक तैयार किया जाता है। इसके बदले 5 से 10 लाख रुपये तक लिए जाते हैं।

दस्तावेजों को लेकर संदेह बढ़ने पर माशीरकर ने थैली की जांच की, जिसमें बड़ी संख्या में डिग्रियां, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र मिले। इसके बाद उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस की मौजूदगी में जांच करने पर अलग-अलग विश्वविद्यालयों के नाम से तैयार कथित फर्जी दस्तावेजों का बड़ा जखीरा सामने आया।

कई नामी विश्वविद्यालयों के नाम पर बने दस्तावेज

बरामद दस्तावेजों में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय, सोलापुर विश्वविद्यालय, श्रीधर यूनिवर्सिटी पिलानी, गोंडवाना विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर समेत कर्नाटक के एक विश्वविद्यालय के नाम से तैयार प्रमाणपत्र शामिल बताए जा रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक, इन दस्तावेजों में डिग्री, सेमेस्टर मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट शामिल हैं। इनमें कथित तौर पर फर्जी मुहर और हस्ताक्षरों का भी इस्तेमाल किया गया था।

करोड़ों के बैंक लेनदेन की जांच

पुलिस जांच में आर्थिक लेनदेन से जुड़े अहम सुराग भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी परिमल गौरकर के कैनरा बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक समेत चार बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी मिली है। अब पुलिस इन खातों की जांच कर रही है और पैसों के स्रोत व लेनदेन से जुड़े लोगों का पता लगाया जा रहा है।

इसके अलावा, आरोपियों द्वारा अन्य लोगों के नाम पर तीन से चार वाहन खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इनमें से कुछ वाहनों को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस को नागपुर में करोड़ों रुपये कीमत के एक फ्लैट की जानकारी भी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है।

कितने लोगों ने फर्जी डिग्री का किया इस्तेमाल?

पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क सिर्फ फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने तक सीमित नहीं हो सकता। अब जांच की जा रही है कि इन कथित फर्जी डिग्रियों और प्रमाणपत्रों के आधार पर कितने लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल करने, कॉलेज में एडमिशन लेने या नौकरी में प्रमोशन पाने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि फरार आरोपी परिमल गौरकर वकालत करता है, जबकि गिरफ्तार आरोपी वैभव सोनुले उसका रिश्तेदार है और वह 12वीं तक पढ़ा हुआ है। मुख्य आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस उसके संभावित ठिकानों, बैंक खातों, संपत्तियों, वाहनों और पूरे कथित नेटवर्क की जांच में जुटी है।

इस मामले में हो सकते हैं अहम खुलासे

दुर्गापुर पुलिस ने मामला दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस निरीक्षक संतोष शेगावकर के मार्गदर्शन में पुलिस उपनिरीक्षक रविंद्र नक्कनवार मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस फर्जी डिग्री नेटवर्क और इसके जरिए हुए आर्थिक लेनदेन से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

मिलिंद दिंन्डेवार की रिपोर्ट

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