Highlights
- IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम अध्यक्ष ने प्रोफेसर दुल्ला पर लगे आरोपों पर सवाल उठाए।
- प्रोफेसर राजकुमार पंत ने कहा, साहिल ने SC/ST सेल में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
- प्रोफेसर पंत ने कहा, परीक्षा में अनुचित साधनों पर कार्रवाई करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है।
मुंबई: IIT बॉम्बे में छात्र साहिल रविंद्र वाकोड़े की आत्महत्या के मामले में संस्थान के फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राजकुमार एस. पंत ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए देखने के बाद दुल्ला ने संस्थान के नियमों के मुताबिक कार्रवाई की थी। पंत ने यह भी कहा कि साहिल ने कथित जातिगत भेदभाव को लेकर संस्थान के एससी/एसटी सेल में कोई शिकायत नहीं की थी।
'जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं'
प्रोफेसर राजकुमार पंत ने कहा कि संस्थान एक युवा छात्र की मौत से बेहद दुखी और परेशान है। उन्होंने कहा कि उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि पूरी जांच और तथ्यों के सामने आने से पहले ही लोग अलग-अलग पक्ष लेने लगे हैं और अपनी धारणाओं के आधार पर बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा,
'हम अपने संस्थान से एक युवा जीवन के चले जाने से बेहद दुखी और परेशान हैं। मेरी समझ में पूरी समस्या यह है कि उचित जांच पूरी होने और मामले के तथ्य सामने आने से पहले ही लोगों ने पक्ष लेना और अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। इन अनुमानों के आधार पर बयान देना और अपनी राय बनाना उचित नहीं है। जांच से जल्द ही वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।'
पंत ने सोशल मीडिया पर होने वाली बहस को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर हर मामले में सोशल मीडिया के जरिए ही किसी को दोषी ठहराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी तो शिक्षक और प्रोफेसर अपना काम कैसे कर पाएंगे। उनके मुताबिक, शिक्षकों का काम पढ़ाना और छात्रों का मूल्यांकन करना है और संस्थान के नियमों का पालन करने के लिए उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
'SC/ST सेल को शिकायत देने का दावा सही नहीं'
जातिगत भेदभाव के आरोपों पर पंत ने कहा कि हर संस्थान की तरह IIT बॉम्बे में भी छात्रों के कल्याण के लिए एक SC/ST सेल है। उन्होंने बताया कि उन्होंने संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर प्रोफेसर रविंद्र गुड़ी से इस संबंध में बात की थी। पंत के मुताबिक, डिप्टी डायरेक्टर ने उन्हें बताया कि SC/ST सेल की ओर से एक नोटिस जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि पिछले तीन-चार महीनों के दौरान साहिल ने सेल से संपर्क नहीं किया था और उनकी ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। पंत ने कहा कि यहां तक कि औपचारिक शिकायत की बात तो दूर, साहिल कथित तौर पर किसी समस्या को लेकर SC/ST सेल के पास पहुंचे तक नहीं थे।
‘प्रोफेसर दुल्ला ने नियमों के मुताबिक काम किया’
प्रोफेसर पंत ने कहा कि शिक्षक संस्थान की ओर से तय प्रक्रियाओं और नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं और प्रोफेसर दुल्ला ने भी ऐसा ही किया। उन्होंने बताया कि दुल्ला पहले डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स रह चुके हैं और फिलहाल डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स के पद पर हैं। पंत ने कहा कि दुल्ला छात्रों की मदद करने वाले व्यक्ति के तौर पर जाने जाते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे व्यक्ति से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद करना उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ परिस्थितियों में शिक्षक को सख्ती से कार्रवाई करनी पड़ती है और दुल्ला ने नियमों के अनुसार ऐसा ही किया। पंत ने कहा,
'मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि वह इस तरह की हरकत करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। मुझे इस दावे में कोई दम नहीं दिखता। हालांकि, जो बातें सामने आई हैं, उन पर मैं आगे टिप्पणी नहीं करना चाहता। FIR दर्ज है और कानून अपना काम करेगा। मेरा मानना है कि मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है, इसलिए इस मामले पर हमें कुछ टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।'
‘परीक्षा में नकल को नजरअंदाज करना भी गलत’
पंत ने कहा कि समाज और संस्थान के नियम साफ हैं कि परीक्षा में नकल या अनुचित साधनों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। अगर किसी शिक्षक को लगता है कि कोई छात्र संस्थान की सुविधाओं का गलत इस्तेमाल कर रहा है या अनुचित तरीके से परीक्षा दे रहा है, तो कार्रवाई न करना उन छात्रों के साथ भी अन्याय होगा जो नकल नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी सभी छात्रों के प्रति समान है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना उसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
कथित टिप्पणियों पर भी पंत ने उठाए सवाल
प्रोफेसर पंत ने प्रोफेसर दुल्ला पर लगाए गए कथित टिप्पणियों के आरोपों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस समय कथित टिप्पणियां की गईं, उस समय छात्र के माता-पिता या बाहर के छात्र वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने खुद भी उस घटना को नहीं देखा था। उन्होंने कहा,
'अगर कोई आरोप लगाया जाता है, तो न तो माता-पिता और न ही बाहर के छात्र उस समय मौजूद थे, जब कथित तौर पर ये टिप्पणियां की गईं। मैं भी वहां मौजूद नहीं था। ऐसे में कोई निश्चित रूप से कैसे कह सकता है कि वास्तव में ऐसा हुआ था?'
'IIT के माहौल में छात्रों पर कई तरह के दबाव'
पंत ने कहा कि छात्र अलग-अलग कारणों से विरोध कर सकते हैं और कई बार कोई एक घटना उनके भीतर पहले से चल रही परेशानियों या निराशा को सामने लाने का कारण बन सकती है। उन्होंने माना कि IIT बॉम्बे का माहौल काफी प्रतिस्पर्धी है। IIT में प्रवेश पाना बेहद मुश्किल होता है और ऐसे माहौल में छात्रों पर कई तरह के दबाव हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि संस्थान ने छात्रों की मदद के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। उनके मुताबिक, IIT बॉम्बे ने वेलनेस सेल बनाए हैं और छात्रों के लिए कई तरह के जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
‘दुल्ला छात्र सुधारों के समर्थक माने जाते हैं’
प्रोफेसर पंत ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें संस्थान में छात्र सुधारों के समर्थक के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा,
'अगर आप उन छात्रों से बात करें, जिनके साथ उन्होंने काम किया है, तो वे सभी एकमत होकर कहेंगे कि जिन लोगों से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती, उनमें प्रोफेसर दुल्ला सबसे आगे होंगे।'
IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है और इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए। बता दें कि इससे पहले प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के समर्थन में IIT मद्रास भी आया था। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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