मुंबई: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई की एशियाटिक सोसाइटी में ‘गणेश ज्ञानार्थी’ विशेष पांडुलिपि प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में भाग लिया और संबोधन दिया। अमित शाह ने कहा, "जो राष्ट्र अपनी स्मृति, इतिहास, संस्कार, भाषा, अभिलेख और परंपराओं की रक्षा नहीं कर सकता, वो कितना भी शक्तिशाली हो, उसको समाप्त होने में देर नहीं लगती है।"
भारत को कोई गुलाम नहीं बना सकता: अमित शाह
अमित शाह ने कहा, "जो राष्ट्र अपनी स्मृति, इतिहास, परंपराएं, संस्कार, अभिलेख, भाषाएं, व्याकरण की रक्षा करता है, वो कितने भी साल गुलाम रहे उसको कोई गुलाम नहीं बना सकता है। भारत इसका उदाहरण है। अनेक लोगों ने प्रयास किया।"
अमित शाह ने कहा, "यहां पूरे विश्व का मार्गदर्शन करने वाला ओजस्वी ज्ञान खड़ा हुआ था, जो सृजित हुआ था, उसको समाप्त करने की कोशिश हुई लेकिन कर नहीं कर पाए। नालंदा का पुस्तकालय तो जला सकते हैं, महीनों तक वहां से धुआं उठे इतनी प्रज्वलता से जला सकते हैं। मगर स्मृति और श्रुति से जो लोगों की चित्त में चित्ती बनकर बसा है वो ज्ञान को कोई समाप्त नहीं कर सकता है।"
अमित शाह ने कहा, "ये जाना-माना इतिहास है। ये हमारे देश का संस्कार है कि जब हम पराजित होते हैं तो धैर्य रखकर आगे बढ़ते हैं और जब विजयी होते हैं तो जिन पर विजय प्राप्त की है, उनकी स्मृतियों को नष्ट किए बगैर हमारी परंपरा में उसको जोड़ने का प्रयास करते हैं।"
अमित शाह ने कहा, "एशियाटिक सोसाइटी में जो परिवर्तन लाना है, परिवर्तन लाना चाहिए। इसके लिए मैं जरूर थोड़ी बात करना चाहता हूं। सच्चा ज्ञान कभी विचारधारा का बंधक नहीं होता है। ज्ञान अपने आप में एक विचारधारा है। अगर आप इसे किसी तरह से बांधते हो तो ज्ञान के मायने ही बदल देते हो। ज्ञान मुक्त होना चाहिए।"
डी-कोलोनाइजेशन की जो प्रक्रिया है, वो इतिहास मिटाना नहीं: अमित शाह
अमित शाह ने कहा, "कई बार देश में बात होती है कि इतिहास को मिटा रहे हैं। मैं इनके साथ व विद्वानों के साथ सहमत नहीं हूं। डी-कोलोनाइजेशन की जो प्रक्रिया है, वो इतिहास मिटाना नहीं है। इसका अर्थ है इतिहास को संपूर्ण प्रामाणिक और भारतीय दृष्टिकोण के साथ फिर से लोगों के सामने रखना। ये डी-कोलोनाइजेशन है और वो होना ही चाहिए। शायद इसके लिए बहुत सारे लोग मुखर कर बोलते नहीं हैं।"
अमित शाह ने कहा, "डी-कोलोनाइजेशन का अर्थ मिटाना नहीं है। हमारे दृष्टिकोण से वो सत्य को दुनिया के सामने, दुनिया के कल्याण के लिए रखना उसी का नाम डी-कोलोनाइजेशन है। क्योंकि उन्होंने इतिहास को, ज्ञान को, परंपराओं को, संस्कृति को अपनी सत्ता को बचाए रखने का साधन बनाया था। आज हम उससे ज्ञान को मुक्त करने के लिए डी-कोलोनाइजेशन के लिए आगे बढ़े हैं। यहां पर ढेर सारी चीजें पड़ी हैं। महाभारत की सचित्र प्रति जैन कल्पसूत्र बौद्ध धर्म के शायद ही कहीं उपलब्ध हो। इस प्रकार के ग्रंथ यहां पर पड़े हैं और बहुत सारा ऐसा ज्ञान यहां पर पड़ा है जिसको शायद बहुत समय के पहले बाहर आ जाना चाहिए था।"
बता दें कि अमित शाह अपने बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं। हाल ही में अमित शाह ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा था और सीमा की सुरक्षा के लिए जमीन न देने का आरोप लगाया था। इस पर टीएमसी ने जवाब भी दिया था।
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