महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री अजीत पवार ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के काम की ऑडिट कराने की मांग की है। अजीत पवार के इस मांग के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। यह जांच विशेष रूप से 20,787 करोड़ की भारी भरकम लागत वाली नागपुर-गोवा 'शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे' परियोजना के बजट, ऋण और निर्माण की प्रक्रिया को लेकर की जाएगी। बता दें कि अजीत पवार का यह कदम महायुति गठबंधन में बढ़ते फंडिंग और सत्ता संतुलन के संघर्ष को उजागर करता है।
MSRDC के वित्तीय मॉडल पर अजीत पवार ने उठाए सवाल
अजीत पवार के वित्त और योजना विभाग ने MSRDC द्वारा पहले ली गई 24,190 करोड़ की ऋष गारंटियों और मौजूदा वित्तीय मॉडल पर भी सवाल उठाए हैं। इससे यह साफ है कि पवार खेमे को इस परियोजना की पारदर्शिता और फंड मैनेजमेंट को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं। बता दें कि नागपुर से गोवा के बीच शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई 802.6 किमी है। इस परियोजना की कुल लागत 20,787 करोड़ हैं। इस परियोजना का उद्देश्य है नागपुर से गोवा तक की यात्रा को 18 घंटे से घटाकर 8 घंटे करना। साथ ही यह रूट धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
देवेंद्र फडणवीस क्या बोले?
इस परियोजना को लेकर राज्य के कई जिलों में किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि बिना पर्याप्त मुआवजा और परामर्श के जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। विपक्षी कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह परियोजना दिल्ली के आकाओं को खुश करने के लिए लाई जा रही है, जबकि स्थानीय किसानों द्वारा इस विरोध किया जा रहा है। वहीं, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि “सरकार के किसी दो विभागों या मंत्रियों में कोई झगड़ा नहीं है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जहां यदि कोई विभाग किसी मामले में प्रश्न पूछता है, तो उसका उत्तर मांगा जाता है।”