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मुंबई की विशेष अदालत का सख्त फैसला, 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को उम्रकैद की हुई सजा, जानिए पूरा मामला

 Reported By: Saket Rai Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Jul 20, 2026 08:32 pm IST,  Updated : Jul 20, 2026 08:34 pm IST

समुद्री डकैती के दो अलग-अलग मामलों में कोर्ट ने 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले को समुद्री सुरक्षा और समुद्री डकैती के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : REPORTER INPUT

मुंबई की विशेष अदालत ने ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज FV अल-कंबर 786 के अपहरण और मार्च 2024 में उसके 23 चालक दल के सदस्यों को बंधक बनाने के मामले में सभी 9 सोमाली नागरिकों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। इस मामले की सुनवाई समुद्री डकैती निरोधक अधिनियम, 2022 (Maritime Anti-Piracy Act, 2022) के तहत हुई। 

मामले की पैरवी येलो गेट पुलिस स्टेशन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट रंजीत वी. सांगले ने की। फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.बी. दिघे की विशेष 28 वीं अदालत ने सुनाया। यह फैसला सोमाली समुद्री डकैती के मामलों में भारत के लगातार दोषसिद्धि के रिकॉर्ड को और मजबूत करता है।

एमवी रूएन मामला

मुंबई की विशेष अदालत ने एमवी रूएन जहाज के अपहरण मामले में सभी 35 सोमाली नागरिकों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह समुद्री डकैती निरोधक अधिनियम, 2022 के तहत भारत का पहला सफल अभियोजन है।

पुलिस की लंबी जांच के बाद कोर्ट पहुंचा मामला

यह मामला मार्च 2024 में भारतीय नौसेना द्वारा जहाज को मुक्त कराए जाने और उसके बाद येलो गेट पुलिस स्टेशन की लंबी जांच के बाद अदालत पहुंचा था। मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट रंजीत वी. सांगले ने की।

ऐतिहासिक माना जा रहा कोर्ट का फैसला

अदालत के इस फैसले को ऐतिहासिक माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर खुले समुद्र में समुद्री डकैती के खिलाफ भारत के सख्त रुख और अपराधियों को कानून के दायरे में लाने की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

35 आरोपियों को ठहराया गया था दोषी

बता दें 20 जुलाई 2026 को मुंबई की विशेष अदालत ने सोमाली समुद्री डकैती से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बड़ा फैसला सुनाते हुए अल-कंबर 786 जहाज अपहरण मामले के सभी 9 और एमवी रूएन अपहरण मामले के सभी 35 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

दोनों मामलों की पैरवी महाराष्ट्र सरकार की ओर से येलो गेट पुलिस स्टेशन ने की, जबकि विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट रंजीत वी. सांगले ने अदालत में अभियोजन पक्ष का नेतृत्व किया। एमवी रूएन मामले में यह फैसला समुद्री डकैती निरोधक अधिनियम, 2022 (Maritime Anti-Piracy Act, 2022) के तहत भारत की पहली दोषसिद्धि है।

समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत

इन दोनों ऐतिहासिक फैसलों ने समुद्र में कार्रवाई से लेकर अदालत में दोषसिद्धि तक समुद्री डकैती के खिलाफ भारत की समन्वित समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है और सोमाली समुद्री डकैती के मामलों में भारत के लगातार दोषसिद्धि के रिकॉर्ड को भी कायम रखा है।

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