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पुणे जमीन घोटाला मामले में पार्थ पवार को मिली बड़ी राहत, कमेटी ने दी क्लीन चिट

 Reported By: Dinesh Mourya, Edited By: Akash Mishra
 Published : Nov 19, 2025 12:57 pm IST,  Updated : Nov 19, 2025 01:04 pm IST

पुणे जमीन घोटाला मामले में पार्थ पवार को अप्रत्यक्ष रूप से कमेटी ने क्लीन चिट दे दी है। इस पर कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की जांच सिर्फ एक दिखावा थी।

पुणे जमीन घोटाला मामले में पार्थ पवार को मिली क्लीन चिट- India TV Hindi
पुणे जमीन घोटाला मामले में पार्थ पवार को मिली क्लीन चिट Image Source : X @PARTHAJITPAWAR

पुणे जमीन घोटाला मामले में पार्थ पवार को बहुत बड़ी राहत मिली है। मामले की जांच के लिए बनाई गई मुठे कमेटी ने पार्थ पवार को अप्रत्यक्ष रुप से क्लीन चिट दे दिया है। कमेटी ने इस घोटाले के लिए दिग्विजय पाटिल( अमेडिया कंपनी के डायरेक्टर), सब रेजिस्ट्रार रविंद्र तारु और शितल तेजवानी को जिम्मेदार ठहराया। बता दें कि इन्हीं तीनों के नाम FIR में भी हैं। वहीं, पार्थ पवार को क्लीन चिट मिलने पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता विजय वड्डेटीवार ने कहा कि पुणे जमीन घोटाले को लेकर जिस बात की आशंका थी वह सही साबित हुई, सरकार की जांच सिर्फ एक दिखावा थी।

'घोटाले की न्यायिक जांच होनी चाहिए'

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इस घोटाले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। भविष्य में मंत्रियों के रिश्तेदार जमीन लूटेंगे और सरकार उन्हें क्लीन चिट देगी, यह रुकना चाहिए।

घोटाले की शुरुआत

महार वतनदारों का आरोप है कि, साल 2007 से शीतल तेजवाणी नाम की महिला ने मुंढवा के 272 महार वतनदारों से संपर्क करना शुरु किया। शीतल तेजवाणी ने इन 272 लोगों को भरोसा दिलाया कि वह सरकार से बात कर उनकी जमीनें फिर उनके नाम पर ट्रांसफर कर देगी। इसके लिए इन 272 लोगों को जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी शीतल के नाम पर करनी होगी। इन लोगों ने भरोसा कर जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी शीतल तेजवाणी के नाम पर कर दी। 

तहसीलदार ने जमीन खाली करने की दिया था आदेश

पुणे जमीन घोटाले की पुलिस जांच में सामने आया है कि अमेडिया कंपनी और शीतल तेजवानी में हुए जमीन के सौदे के बाद आरोपी तहसीलदार सूर्यकांत येवले ने इस साल जून महीने में Botanical Survey of India को नोटिस जारी करके जमीन खाली करने का आदेश दिया था। मुंधवा की 40 एकड़ सरकारी जमीन फिलहाल Botanical Survey of India के पास लीज पर है। तहसीलदार ने अपने नोटिस में कहा था कि पावर ऑफ अटॉर्नी धारक शीतल तेजवानी ने यह जमीन अमेडिया कंपनी को बेच दिया है। ऐसे में अमेडिया एलएलपी इस जमीन का फिजिकल पजेशन चाहती है, इसीलिए इस जमीन को खाली किया जाए।

जांच कैसे शुरू हई?

तहसीलदार का नोटिस मिलने के बाद Botanical Survey of India ने इसकी शिकायत पुणे कलेक्टर कार्यालय से की। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए तब कलेक्टर ने Botanical Survey of India से कहा कि उन्हें जमीन खाली करने की जरूरत नहीं है, एसडीएम इस मामले की जांच करेंगे। 

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