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'सेवा उपकार नहीं कर्तव्य है', कर्मयोगी शिक्षक सम्मान समारोह में बोले RSS चीफ मोहन भागवत

 Reported By: Rajesh Kumar Edited By: Niraj Kumar
 Published : May 02, 2026 11:13 pm IST,  Updated : May 02, 2026 11:15 pm IST

मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर ‘कर्मयोगी एकल शिक्षक मेळावा 2026’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के समर्पित शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सेवा और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

Mohan Bhagwat- India TV Hindi
मोहन भागवत, संघ प्रमुख Image Source : REPORTER INPUT

मुंबई: मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर कै. लक्ष्मणराव मानकर स्मृती संस्था (मानकर ट्रस्ट) द्वारा आयोजित 'कर्मयोगी एकल शिक्षक मेळावा 2026' और 'कर्मयोगी पुरस्कार वितरण' समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि सेवा उपकार नहीं बल्कि अपना कर्तव्य है और इससे स्वयं का भी विकास होता है।

इस सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि  "यह कर्मवीरों का कार्यक्रम है। यह संवेदना से उपजा हुआ कार्य है और यह दया नहीं, बल्कि अपनेपन की संवेदना है।" उन्होंने कहा, “मनुष्य जन्म जगत को देने के लिए है। सेवा यह उपकार नहीं बल्कि अपना कर्तव्य है और इससे स्वयं का भी विकास होता है। युगों से भारत में मानवता का यह स्वभाव सनातन धर्म ने बरकरार रखा है।"

किन शब्दों में अभिनंदन किया जाए

उन्होंने कहा, "जिसे हम अविकसित कहते हैं उनका विकास हम करते हैं यह बात सही है, उनका विकास करते करते हमारा विकास होता है। हम पशुओं की तरह सभी गुण

धर्म से युक्त एक मनुष्य नाम के जानवर से सच में मनुष्य बनते हैं। ऐसा काम करने वाले कर्मवीर हैं। उनका अभिनंदन किन शब्दों में किया जाए। ये शिक्षक दूसरों को देने के लिए कष्ट सहते हैं  और यह भारत भूमि का स्वभाव है। यह स्वभाव युगों युगों से भारतभूमि ने मनुष्य में लाई। अलग-अलग काल में अलग अलग नाम से आई। आज उसे सामान्य भाषा में हिन्दू नाम से पहचाना जाता है। 

उन्होंने कहा कि उस समाज का यह सनातन काल से चलता आ रहा स्वभाव है, पर अपनी अपेक्षा और विदेश से आये आक्रमणकारियों की वजह से यह स्वभाव जिन्होंने संभालकर रखा उनकी दुर्दशा हो गई, क्योंकि इसी एक भाग में विदेशी आक्रमणकारियों ने यह पहचाना की इस समाज का ये स्वभाव, इस समाज की अमरता का रहस्य है। इसलिए यह स्वभाव जिसने संभालकर रखा है उन्हें परेशान किया जाए, पर उस स्थिति में भी आज अब तक संभाला है, जिन्हें हम आदिवासी कहते हैं। SC, ST कहते हैं, उन सब ने संभालकर लाया है। हम उन्हें मुख्य प्रवाह में लेकर आते हैं।

आदिवासी भाई-बहनों को भी अवसर मिले

मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि देश के नागरिकों को जो अवसर मिलते हैं, वे आदिवासी भाई-बहनों को भी मिलने चाहिए। अपनी संस्कृति जहां जन्मी है, वह जंगल और खेती से जुड़ी है। उनकी अस्मिता देश की अस्मिता है। अस्मिता के बिना हमारा अस्तित्व नहीं टिक सकता। इसीलिए हमारा काम पिछड़ों को मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने आदिवासी समाज की सराहना करते हुए कहा, अब तक सभी विपरीत परिस्थितियों का सामना कर उन्होंने अपना ज्ञान सुरक्षित रखा है। इसीलिए उनकी मदद करते हुए हमें भी वह ज्ञान प्राप्त करना होगा। भागवत जी ने मानकर ट्रस्ट के कार्य की प्रशंसा की और इसी विचारधारा से संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सराहा।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत एकल विद्यालयों के समर्पित शिक्षकों को सम्मानित किया गया। एक शिक्षक द्वारा संचालित इन विद्यालयों ने दूर-दराज के वनवासी इलाकों में शिक्षा की रोशनी पहुंचाई है। शिक्षण, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक परिवर्तन में योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संगठनों को 'कर्मयोगी पुरस्कार' प्रदान किए गए। 

नितिन गडकरी का संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी पुरानी यादों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जब वे ABVP से जुड़े थे, तब महाराष्ट्र के चंद्रपुर और गडचिरोली जिलों में सामाजिक कार्य की शुरुआत की थी। उस समय यह क्षेत्र नक्सली प्रभावित था और नक्सली मूवमेंट घर-घर तक पहुंच चुकी थी। आदिवासी समाज की स्थिति काफी गंभीर थी।

गड़करी ने कहा कि साल 1996 मे जब नक्सलप्रभावित इलाकों में सभा के लिए जाता था और सभा के बाद जब किसी कार्यकर्ता के घर जाकर चाय पीने की इच्छा जताता था तब पुलिस वाले कहते थे कि साहब आप यहां से जल्द अपने हेलीकॉप्टर से निकल जाइए। जब तक आप हैं यहां तब तक हमें बहुत तनाव है। तब ये स्थिति थी लेकिन अब बहुत कुछ बदला है।

गडकरी  ने बताया कि उस कठिन समय में संघ के कई स्वयंसेवक इन इलाकों की सामाजिक स्थिति बदलने के लिए कार्य कर रहे थे। जब मनोहर जोशी मुख्यमंत्री थे और मैं उनके कैबिनेट में मंत्री था। तब मेलघाट नाम की जगह में 2500 बच्चों की मौत हुई थी। बड़ा बवाल हुआ था। पता चला कि उस इलाके तक जाने के लिए सड़क नहीं थी। तब हमने उस इलाक़े में खूब सड़कें बनाई।

6.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश 

आज देवेंद्र जी के नेतृत्व में इन इलाकों का और विकास हो रहा है। आज इन क्षेत्रों में 6.5 लाख करोड़ रुपये की निवेश आई है। उन्होंने संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी युवाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास की जरूरत है तथा सामाजिक विषमता दूर करने की आवश्यकता है।

मानकर ट्रस्ट इसी दिशा में कार्य कर रहा है। गडकरी जी ने भविष्य का लक्ष्य रखते हुए कहा कि आने वाले समय में इस संस्था के माध्यम से 1 लाख आदिवासी विद्यार्थी और 5 हजार शिक्षकों को तैयार करने का काम पूरा किया जाएगा। अब इस कार्य को केवल विदर्भ तक सीमित न रखकर पूरे महाराष्ट्र में विस्तार देने का लक्ष्य है।

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