आइजोल: मिजोरम के उपमुख्यमंत्री एवं मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तानलुइया ने शुक्रवार को दावा किया कि पार्टी सभी जो जनजातियों को एक प्रशासनिक इकाई के तहत लाने का प्रयास कर रही है। तानलुइया ने सूबे की राजधानी आइजोल में MNF के कार्यालय में पार्टी की एक बैठक को संबोधित करते हुए दावा किया कि 1986 में केंद्र के साथ मिजोरम शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के समय सभी जो जनजातियों का पुन: एकीकरण और उन्हें एक प्रशासनिक इकाई के तहत लाना प्रमुख एजेंडा था।
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हम भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं: तानलुइया
बैठक को संबोधित करते हुए तानलुइया ने कहा, ‘MNF के संविधान में सभी जो जातीय लोगों के पुन: एकीकरण और उन्हें एक प्रशासनिक इकाई के तहत लाने का भी जिक्र है। हम अब तक इस मुद्दे पर केंद्र पर दबाव बनाते रहे हैं।’ मिजोरम के उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम भौगोलिक सीमाओं के कारण अलग हो गए हैं, लेकिन हमारे जातीय संबंध साझा हैं और हम भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। MNF एक प्रशासनिक इकाई के तहत रहने का सपना देख रहा है और हम शुरू से ही इसका समर्थन करने की कोशिश कर रहे हैं।’
मुख्य रूप से 3 देशों में रहती हैं जो जनजातियां
तानलुइया ने दावा किया कि मिजो शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले बातचीत के दौरान जो जनजातियों को एक प्रशासनिक इकाई के तहत लाने और राज्य की राजनीतिक सीमा के मुद्दों पर व्यापक रूप से चर्चा की गई थी। बता दें कि जो जनजातियां मुख्य रूप से 3 देशों, भारत, बांग्लादेश और म्यांमार में रहती हैं। उन्हें मिजो (मिजोरम), चिन (म्यांमार), कुकी-चिन (बांग्लादेश) और कुकी (मणिपुर) जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। ये जनजातियां कम से कम 6 पूर्वोत्तर राज्यों- मिजोरम, मणिपुर, असम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में फैली हुई हैं। (भाषा)