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पुरानी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रीन्यू कराना पड़ेगा महंगा, सरकार ने फीस में की भारी-भरकम बढ़ोतरी

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 23, 2025 02:53 pm IST,  Updated : Aug 23, 2025 02:54 pm IST

सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन रीन्यूअल फीस में भारी बढ़ोतरी करने का उद्देश्य लोगों को ज्यादा पुरानी गाड़ियों को रखने से हतोत्साहित करना है, ताकि लोग खुद ही पुरानी गाड़ियों का इस्तेमाल बंद कर दें और उसे स्क्रैप करा लें।

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आयातित वाहनों के लिए भी फीस में भारी-भरकम बढ़ोतरी Image Source : PTI

अगर आपके पास कोई पुरानी गाड़ी है, जिसका रजिस्ट्रेशन रीन्यू कराना है तो अब आपको मोटी रकम खर्च करनी होगी। जी हां, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 20 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों रजिस्ट्रेशन रीन्यूअल फीस में भारी-भरकम बढ़ोतरी कर दी है। सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन रीन्यूअल फीस में भारी बढ़ोतरी करने का उद्देश्य लोगों को ज्यादा पुरानी गाड़ियों को रखने से हतोत्साहित करना है, ताकि लोग खुद ही पुरानी गाड़ियों का इस्तेमाल बंद कर दें और उसे स्क्रैप करा लें।

लाइट मोटर व्हीकल के लिए अब लगेगी 10,000 रुपये की फीस

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि 20 साल से ज्यादा पुराने हल्के मोटर वाहनों (LMV) के रजिस्ट्रेशन को रीन्यू कराने की फीस अब 5000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। इसी तरह 20 साल पुराने दोपहिया वाहनों के लिए रीन्यूअल फीस को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है जबकि तिपहिया एवं क्वाड्रिसाइकिल के लिए ये फीस शुल्क 3500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दी गई है। 

आयातित वाहनों के लिए भी फीस में भारी-भरकम बढ़ोतरी

आयातित दोपहिया और तिपहिया वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण पर अब 20,000 रुपये और चार पहिया या उससे बड़े आयातित वाहनों पर 80,000 रुपये की फीस देनी होगी। इस संबंध में जारी मसौदा संशोधन को फरवरी में सार्वजनिक किया गया था और इसे 21 अगस्त को अंतिम रूप दिया गया। मंत्रालय ने इससे पहले अक्टूबर, 2021 में भी व्हीकल रजिस्ट्रेशन और रीन्यूअल फीस बढ़ाई थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कार्रवाई पर लगाई थी रोक

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त की शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ी के मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वाहनों के निर्माण वर्ष के बजाय उनके वास्तविक उपयोग को देखते हुए वाहनों को इस्तेमाल से बाहर करने की नीति लागू की जाए।

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