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सरकारी बैंकों की हालत में आ रहा है सुधार, RBI गवर्नर दास ने बताई इसकी मुख्‍य वजह

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Dec 31, 2018 08:12 pm IST,  Updated : Dec 31, 2018 08:12 pm IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि बैंकों के फंसे कर्जों (एनपीए) में अब कमी आ रही है तथा सरकारी बैंकों की हालत सुधर रही है।

RBI Governor- India TV Hindi
RBI Governor Image Source : RBI GOVERNOR

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि बैंकों के फंसे कर्जों (एनपीए) में अब कमी आ रही है तथा सरकारी बैंकों की हालत सुधर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संचालन व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। रिजर्व बैंक की अर्धवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में दास ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जो कमजोर बैंक हैं उन्हें नई पूंजी उपलब्ध कराकर समर्थन देने की आवश्यकता है। 

दास ने कहा कि लंबे समय तक दबाव में रहने के बाद अब ऐसा लगता है कि बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधार के रास्ते पर है। बैंकों पर अवरुद्ध कर्जों का बोझ कम हो रहा है। दास ने इसी महीने की शुरुआत में रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद संभाला है। पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के अचानक अपने पद से इस्तीफा देने के बाद इस पद पर उनकी नियुक्ति की गई। उन्होंने कहा की सितंबर तक की अवधि में सकल एनपीए अनुपात में कमी आई है। पिछले तीन साल के दौरान यह इसमें पहली गिरावट है। उन्होंने बैंकों एनपीए संबंधी पूंजी प्रावधान कवरेज अनुपात (पीसीआर) में सुधार को भी रेखांकित किया। उन्होंने इसे बढ़ते दबाव के समक्ष बैंकों के मजबूती से खड़े होने की क्षमता के तौर पर सकारात्मक संकेत बताया। 

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का सकल एनपीए अनुपात सितंबर 2018 में घटकर 10.8 प्रतिशत रह गया जो कि मार्च 2018 में 11.5 प्रतिशत पर पहुंच गया था। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2018 में जहां 15.2 प्रतिशत के करीब पहुंच गया था सितंबर 2018 में यह घटकर 14.8 प्रतिशत रह गया। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा आधार परिदृश्य को देखते हुए सभी बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2019 तक कम होकर 10.3 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है जो कि सितंबर 2018 में यह 10.8 प्रतिशत रह गया।  रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा, हालांकि एनपीए का मौजूदा स्तर ऊंचा है लेकिन रिजर्व बैंक द्वारा किये गये दबाव परीक्षण में यह संकेत मिलता है कि भविष्य में इसमें सुधार होगा। 

दास ने कहा कि संपत्ति गुणवत्ता समीक्षा के साथ पुराने फंसे कर्ज की पहचान के लिये जो वृहद समीक्षा शुरू की गई थी उसके साथ ही एनपीए के मोर्चे पर काफी काम हुआ है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में परिचालन के स्तर पर सुधार लाने की जरूरत है। इन्हीं बैंकों में फंसे कर्ज का बड़ा हिस्सा है। दास ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा है कि संबंद्ध पक्षों ने अब तक जो भी गहन प्रयास किया है उसे अब संचालन और निगरानी व्यवस्था के स्तर पर व्यापक सुधारों के साथ मजबूती देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के कमजोर बैंकों को नई पूंजी का सहारा देने की भी जरूरत है।

गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि ऊंची लागत होने के बावजूद एनपीए की पहचान बढ़ने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिचालन जोखिम आकलन की स्थिति में सुधार आया है। उन्होंने कहा कि  इससे लगता है कि रिण आकलन में अनुशासन बेहतर हुआ है, बाजार जोखिम के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है और परिचालन जोखिम मूल्यांकन बेहतर हुआ है। दास ने इस बात को माना है कि दो साल पुराने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता रूपरेखा ढांचे के तहत समाधान के लिये भेजे गये कुछ मामलों में तय समयसीमा से ज्यादा समय लगा है लेकिन उन्होंने कहा कि दिवाला एवं रिणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) से ऋण अनुशासन मजबूत होगा।

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