नई दिल्ली। राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार चालू वित्त वर्ष के प्रस्तावित खर्चों में कोई व्यय कटौती नहीं करेगी। उल्लेखनीय है कि इस अवधि के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 3.5% रखा था, जबकि इस समय राजकोषीय घाटा लक्ष्य के 113.7% तक पहुंच चुका है। यहां एक कार्यक्रम से अलग पत्रकारों के साथ बातचीत में व्यय सचिव अजय नारायण झा ने गुरुवार को कहा कि व्यय में कोई कटौती नहीं होगी। यह एक नीति है, कि व्यय में कोई कटौती नहीं होगी।
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जब उनसे पूछा गया कि सरकार 3.5% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को कैसे प्राप्त करेगी तो उन्होंने कहा कि संशोधित लक्ष्य में अप्रत्यक्ष कर संग्रहण को पहले ही जोड़ लिया गया है। सरकार ने जीएसटी के मात्र 11 महीनों के हिसाब किताब को शामिल किया है जबकि व्यय का हिसाब-किताब 12 महीने का है। इसकी वजह मार्च की जीएसटी की वसूली के आंकड़ों का अप्रैल में आना है।
जनवरी 2018 तक देश का राजकोषीय घाटा 6.77 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया था यह पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य का 113.7% है। सरकार ने हाल में पेश किए आम बजट में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में संशोधन कर जीडीपी के 3.5% यानी 5.95 लाख करोड़ रुपए पर तय किया था। पहले इसे जीडीपी के 3.2% पर रखा गया था। झा ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार और वृद्धि के संकेत दिख रहे हैं। सरकार को वृद्धि की उम्मीदों पर खरे उतरने की उम्मीद है।