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खाद्य कीमतों में कमी से महंगाई दर में राहत, 6 महीने के निचले स्तर पर पहुंची थोक महंगाई दर

थोक कीमतों पर आधारिक महंगाई दर अगस्त में 11.39 प्रतिशत थी, जबकि सितंबर 2020 में थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर 1.32 फीसदी थी।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: October 14, 2021 18:01 IST
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Photo:PTI

लगातार छठे महीने थोक महंगाई दर 10 प्रतिशत से ऊपर

नई दिल्ली। थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर 6 महीने के निचले स्तर पर आ गयी है। आज जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में थोक महंगाई दर घटकर 10.66 प्रतिशत पर रही। गिरावट खाद्य कीमतों में आई कमी की वजह से रही है, हालांकि इस दौरान तेल कीमतों में बढ़त देखने को मिली है। वहीं दूसरी तरफ सब्जियों की कीमतों ने थोड़ी राहत दी है। इससे पहले आये आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में खुदरा महंगाई दर घटकर 4.35 प्रतिशत पर आ गयी।

 

क्या हुआ महंगा और क्या हुआ सस्ता

आंकड़ों के मुताबिक थोक कीमतों पर आधारिक महंगाई दर अगस्त में 11.39 प्रतिशत थी, जबकि सितंबर 2020 में थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर 1.32 फीसदी थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘पिछले वर्ष के इसी महीने के मुकाबले सितंबर 2021 में मुद्रास्फीति की उच्च दर मुख्य रूप से खनिज तेलों, बेस मेटल्स, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, रसायनों और रासायनिक उत्पादों आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।’’ हालांकि दूसरी तरफ खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति में लगातार पांचवें महीने कमी हुई। इस दौरान सब्जियां सस्ती हुईं, हालांकि दलहन में तेज बनी रहीं। ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति सितंबर में 24.91 प्रतिशत थी, जो इससे पिछले महीने 26.09 प्रतिशत थी। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में सितंबर में 43.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो इससे पिछले महीने में 40.03 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति इस दौरान 11.41 प्रतिशत रही। 

सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत पर 

खाद्य वस्तुओं के दाम कम होने से खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर महीने में घटकर 4.35 प्रतिशत पर आ गयी। मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़े के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 5.30 प्रतिशत तथा सितंबर, 2020 में 7.27 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर इस साल सितंबर में नरम होकर 0.68 प्रतिशत रही। यह पिछले महीने 3.11 प्रतिशत के मुकाबले काफी कम है। भारतीय रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर विचार करते समय मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर पर गौर करता है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को 2 प्रतिशत घट-बढ़ के साथ खुदरा मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखने की जिम्मेदारी दी हुई है। आरबीआई ने 2021-22 के लिये सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में संतुलित जोखिम के साथ इसके 5.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है। 

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