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हवाई यात्रा हुई महंगी! सिर्फ एक महीने में 72 घरेलू रूट्स पर 20% तक बढ़ा किराया

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jul 27, 2026 11:15 pm IST,  Updated : Jul 27, 2026 11:15 pm IST

सरकार ने संसद में बताया है कि देश के 72 घरेलू हवाई रूट्स पर किराया एक महीने के भीतर औसतन 20.5% तक बढ़ गया है। महंगे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी का असर अब सीधे यात्रियों की टिकट कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

विमानों का किराया बढ़ा- India TV Hindi
विमानों का किराया बढ़ा Image Source : PTI

गर्मी की छुट्टियों में हवाई जहाज से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर बड़ा बोझ पड़ा है। विमानन नियामक संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 72 घरेलू रूट्स पर औसत हवाई किराए में 20.5 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जून 2026 में 72 चुनिंदा घरेलू मार्गों पर औसत हवाई किराया पिछले महीनों की तुलना में लगभग 20.5 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हालांकि, मंत्रालय की ओर से उन 72 रूट्स के नामों का खुलासा नहीं किया गया है।

क्यों महंगा हुआ हवाई सफर?

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री ने संसद में बताया कि एयरलाइंस का परिचालन खर्च  काफी डायनामिक होता है। हवाई किराए में उतार-चढ़ाव कई मुख्य कारकों पर निर्भर करता है:

  • विमान ईंधन (ATF) की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के दाम। ATF का खर्च किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है।
  • विदेशी मुद्रा दरें और टैक्स: डॉलर के मुकाबले रुपये की फॉरेन एक्सचेंज रेट, एक्साइज ड्यूटी, वैट और विमान के लीज रेंट का सीधा असर उड़ानों की लागत पर पड़ता है।

क्या सरकार तय करती है हवाई किराया?

संसद में दिए गए एक अन्य लिखित जवाब में मंत्री ने साफ किया कि सरकार हवाई किराए को सीधे तौर पर कंट्रोल नहीं करती है। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 135 के तहत, देश की सभी एयरलाइंस को अपना हवाई किराया खुद तय करने का अधिकार है। कंपनियां संचालन लागत, सर्विस क्वालिटी और उचित मुनाफे को ध्यान में रखते हुए खुद ही अपनी उड़ानों का टैरिफ तय करती हैं।

यात्रियों पर क्या पड़ा असर?

गर्मियों के सीजन और त्योहारी मौकों पर हवाई टिकटों की मांग काफी बढ़ जाती है। डायनेमिक प्राइजिंग मॉडल के कारण सीटें कम होने पर एयरलाइंस किराए में बढ़ोतरी कर देती हैं। ऐसे में 20% से ज्यादा की यह बढ़ोतरी उन यात्रियों के लिए बड़ा झटका है, जो अंतिम समय में या पीक टाइम में अपनी यात्रा की प्लानिंग बनाते हैं। वहीं, अगर ATF की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और अन्य परिचालन खर्च नहीं घटते, तो आने वाले महीनों में भी एयर टिकट महंगे रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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