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Home Loan समेत सभी तरह के लोन हो सकते हैं सस्ते, प्रमुख ब्याज दर में और गिरावट आने की उम्मीद

 Written By: Pawan Jayaswal
 Published : Feb 27, 2025 10:54 pm IST,  Updated : Feb 27, 2025 10:54 pm IST

महंगाई में कमी (सकल मुद्रास्फीति 4.3 प्रतिशत) ने आरबीआई के लिए नीतिगत मोर्चे पर गुंजाइश बना दी है। एग्रीकल्चर सेक्टर में भी मजबूती दिख रही है, जो मुद्रास्फीति नियंत्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अच्छा संकेत है।’

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लोन पर ब्याज दर Image Source : FILE

महंगाई के जनवरी महीने में कम होकर 4.3 फीसदी पर आने से आरबीआई के लिए प्रमुख ब्याज दर में कटौती को लेकर गुंजाइश बढ़ी है। प्रतिष्ठित शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड इकनॉमिक रिसर्च (NCAER) ने अपने मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में यह कहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में रेपो रेट को 0.25 फीसदी घटाकर 6.25 फीसदी कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक अप्रैल में होनी है। समीक्षा में कहा गया है कि प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भी कुछ प्रमुख आंकड़े मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई, जीएसटी कलेक्शन और ऑटो सेल्स इकोनॉमी में बदलाव के संकेत दे रहे हैं। रेपो रेट कम हुई तो उसके बाद बैंक लोन पर ब्याज दरें घटा सकते हैं।

GST कलेक्शन में मजबूत वृद्धि

शोध संस्थान ने कहा कि सकल और शुद्ध रूप से जीएसटी कलेक्शन में पिछले महीने क्रमशः 12.3 फीसदी और 10.9 फीसदी की मजबूत वृद्धि हुई है। जबकि दिसंबर, 2024 में इसमें क्रमश: 7.3 फीसदी और 3.3 फीसदी की ही वृद्धि हुई थी। एनसीएईआर की महानिदेशक पूनम गुप्ता ने कहा, ‘‘महंगाई में कमी (सकल मुद्रास्फीति 4.3 प्रतिशत) ने आरबीआई के लिए नीतिगत मोर्चे पर गुंजाइश बना दी है। एग्रीकल्चर सेक्टर में भी मजबूती दिख रही है, जो मुद्रास्फीति नियंत्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अच्छा संकेत है।’’

FII की निकासी 

उन्होंने कहा कि एक अन्य कारक जिस पर नजर रखने की जरूरत है, वह है एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की लगातार पूंजी निकासी। गुप्ता ने कहा, ‘‘अध्ययनों से पता चलता है कि एफआईआई प्रवाह घरेलू कारकों की तुलना में बाहरी कारकों से अधिक प्रेरित होता है और इसलिए इसकी प्रकृति काफी अस्थिर है। अतीत की तरह, भारत से एफआईआई की निकासी का मौजूदा चरण वैश्विक घटनाक्रमों का परिणाम है।’’

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