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AU Small Finance Bank को RBI से मिला यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस, जानें क्या होगा फायदा

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 08, 2025 12:34 pm IST,  Updated : Aug 08, 2025 12:34 pm IST

आरबीआई से लाइसेंस मिलने के साथ ही एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को अब अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए हरी झंडी भी मिल गई है।

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एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने सितंबर 2024 में लाइसेंस के लिए किया था आवेदन Image Source : AU SMALL FINANCE BANK

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को कहा कि उसने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड को यूनिवर्सल बैंक के रूप में काम करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी देने का फैसला लिया है। इसका सीधा मतलब ये हुआ कि अब एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बाकी बैंकों की तरह कारोबार कर पाएगा। इसी के साथ, ये लगभग एक दशक में जारी किया गया पहला पूर्ण बैंकिंग लाइसेंस है। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को साल 2015 में स्मॉल फाइनेंस बैंक का लाइसेंस मिला था। जिसके बाद बैंक ने अप्रैल, 2017 में एक स्मॉल फाइनेंस बैंक के रूप में अपना कामकाज शुरू किया था। 

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने सितंबर 2024 में लाइसेंस के लिए किया था आवेदन

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का देश के 21 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 2505 से ज्यादा सेंटर का नेटवर्क है। जून, 2025 के अंत तक इसका कस्टमर बेस 1.15 करोड़ और वर्कफोर्स 53,000 से ज्यादा था। बताते चलें कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने सितंबर 2024 में लाइसेंस के लिए आरबीआई के पास आवेदन किया था, जिससे उसे बड़े लोन जारी करने, ज्यादा ग्राहक बनाने और सब्सिडरी कंपनियां बनाने के लिए अपने परिचालन का विस्तार करने की अनुमति मिल जाएगी, जो सभी स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए सीमित हैं। 

2015 में कोलकाता के बंधन बैंक को मिला था लाइसेंस

आरबीआई ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से पहले कोलकाता के बंधन बैंक को साल 2015 में इस तरह का लाइसेंस जारी किया था, जो पहले एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी थी। भारत के बैंकिंग रेगुलेटर भारतीय रिजर्व बैंक ने सबसे पहले स्मॉल फाइनेंस बैंकों को पूरी तरह से विकसित बैंकों में बदलने के लिए साल 2014 में दिशानिर्देश जारी किए थे। जिसके बाद आरबीआई ने पिछले साल अप्रैल में उन दिशानिर्देशों को ज्यादा विस्तृत मानदंडों में सुधार करते हुए अपडेट किया था। इसमें संतोषजनक प्रदर्शन के 5 साल का ट्रैक रिकॉर्ड, 10 अरब रुपये (114 मिलियन डॉलर) की नेट वर्थ, पूंजीगत जरूरतों को पूरा करना, हालिया मुनाफा और सीमित NPA शामिल थीं।

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