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"डार्क पैटर्न" पर सख्त हुआ CCPA, ग्राहकों को धोखे में नहीं रख सकती ई-कॉमर्स कंपनियां, सेल्फ ऑडिट के दिये निर्देश

Written By: Pawan Jayaswal Published : Jun 07, 2025 09:54 pm IST, Updated : Jun 07, 2025 09:54 pm IST

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने डार्क पैटर्न के बढ़ते चलन पर लगाम लगाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group – JWG) का गठन किया है। इस समूह में विभिन्न मंत्रालयों, नियामकों, उपभोक्ता संगठनों और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

ई कॉमर्स कंपनियां- India TV Paisa
Photo:FILE ई कॉमर्स कंपनियां

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देश में संचालित सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। इसमें कहा गया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को अपनी वेबसाइटों और ऐप्स पर इस्तेमाल किए जा रहे "डार्क पैटर्न" को खत्म करना होगा। डार्क पैटर्न उपभोक्ताओं को धोखे से गुमराह करने वाली भ्रामक डिजाइन तरकीबें होती हैं। सीसीपीए ने कहा है कि कंपनियों को डार्क पैटर्न की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए तीन महीने के भीतर सेल्फ-ऑडिट करना होगा। इस ऑडिट के बाद कंपनियों को यह सेल्फ डिक्लेरेशन भी करनी होगी कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसे कोई भी डार्क पैटर्न मौजूद नहीं हैं। CCPA का मानना है कि इस तरह के सेल्फ डिक्लेरेशन से उपभोक्ताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच विश्वास बढ़ेगा तथा डिजिटल बाजार में अधिक ईमानदारी और पारदर्शिता आएगी।

JWG का किया गया गठन

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने डार्क पैटर्न के बढ़ते चलन पर लगाम लगाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group – JWG) का गठन किया है। इस समूह में विभिन्न मंत्रालयों, नियामकों, उपभोक्ता संगठनों और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। JWG का मुख्य कार्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर डार्क पैटर्न के उपयोग की निगरानी करना और समय-समय पर उपभोक्ता मामलों के विभाग को इसकी जानकारी देना है। साथ ही, यह समूह उपभोक्ताओं को ऐसे भ्रामक तरीकों के बारे में जागरूक करने के लिए कार्यक्रम भी सुझाएगा।

ओला और ऊबर को आया था नोटिस

पिछले महीने केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने डार्क पैटर्न के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर 50 से अधिक ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ एक बैठक भी की थी। इस दौरान, उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह जोशी ने स्पष्ट किया कि यह कोई छोटी-मोटी समस्या नहीं है, बल्कि यह सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने सभी प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे न केवल खुद इन नियमों का पालन करें, बल्कि अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद थर्ड-पार्टी मर्चेंट्स को भी ऐसे भ्रामक तरीकों का उपयोग करने से रोकें। हाल ही में, CCPA ने कैब सेवा देने वाले ऐप्स, जैसे Uber और Ola को उनके "एडवांस टिप" फीचर को लेकर नोटिस भी जारी किया है, जो डार्क पैटर्न का एक उदाहरण माना जा रहा है।

डार्क पैटर्न क्या हैं?

डार्क पैटर्न्स वेबसाइट या ऐप के यूआई/यूएक्स (यूजर इंटरफ़ेस और यूजर एक्सपीरियंस) में छिपे हुए डिजाइन या तरीके होते हैं, जिनका प्राथमिक उद्देश्य उपभोक्ताओं को धोखे में डालना होता है। इन तरीकों को अक्सर इस तरह से बनाया जाता है कि ग्राहक अनजाने में ही किसी सेवा को चुन लें, अतिरिक्त शुल्क दे दें, या ऐसा कुछ करें जो वे वास्तव में नहीं चाहते थे। उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय इन भ्रामक डिज़ाइनों पर सक्रिय रूप से लगाम लगाने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में 2023 में डार्क पैटर्न्स को रोकने और उन्हें विनियमित करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए गए थे।

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