शेयर बाजार की हलचल के बीच बुधवार को कमोडिटी बाजार और उससे जुड़े इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स (ETFs) में एक अलग ही चमक देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 15 दिनों के युद्धविराम के ऐलान के बाद जहां एक तरफ शेयर बाजार झूम उठा, वहीं दूसरी तरफ गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भी निवेश का सैलाब उमड़ पड़ा। आलम यह रहा कि कई सिल्वर ETF के भाव एक ही दिन में 4% से ज्यादा उछल गए।
चांदी के ETFs में आई सुनामी
बाजार में सबसे ज्यादा रौनक चांदी से जुड़े ETFs में देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की मांग बढ़ने का सीधा असर भारतीय एक्सचेंज पर दिखा। SBI और निपॉन इंडिया सिल्वर ETF में 4.3% से ज्यादा की तूफानी तेजी दर्ज की गई। वहीं, ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF करीब 4.1% की मजबूती के साथ बंद हुआ।टाटा सिल्वर ETF में भी 4% से अधिक की बढ़त देखी गई। जानकारों का कहना है कि चांदी को न केवल सुरक्षित निवेश माना जा रहा है, बल्कि औद्योगिक मांग ने भी इसकी कीमतों को पंख लगा दिए हैं।
सोने की चमक भी हुई तेज
गोल्ड ETFs ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया और अंतरराष्ट्रीय तेजी के साथ कदम से कदम मिलाया। निपॉन इंडिया गोल्ड BeES में करीब 2.4% की बढ़त देखी गई। ICICI और SBI गोल्ड ETF भी 2.3% से ज्यादा चढ़कर ट्रेड करते दिखे। स्पॉट गोल्ड का भाव वैश्विक बाजार में 2.3% बढ़कर $4,812 प्रति औंस के करीब पहुंच गया है, जो कि पिछले तीन हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है।
क्यों भाग रहे हैं कीमती धातुओं के दाम?
युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे महंगाई को लेकर डर थोड़ा कम हुआ है। लेकिन इस बीच अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी ने सोने और चांदी को विदेशी निवेशकों के लिए सस्ता और अट्रैक्टिव बना दिया है। आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलता है।
क्या कहते हैं मार्केट एक्सपर्ट?
बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान में निवेशकों का व्यवहार काफी दिलचस्प है। एक ओर वे शेयर बाजार (इक्विटी) में पैसा लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए सोने-चांदी को भी नहीं छोड़ रहे हैं। इसे मिक्स्ड सेंटीमेंट कहा जाता है।