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Defence Budget 2026: GDP के 3% तक बढ़ाया जाना चाहिए रक्षा बजट, एक्सपर्ट्स को चिंता का विषय बना ये ट्रेंड

रक्षा पूंजीगत खर्च, जिससे आधुनिकीकरण और नई खरीद को फंड मिलता है, उसमें भी बढ़त दर्ज की गई है। ये 2015-16 में 83,614 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1.92 लाख करोड़ रुपये हो गया।

Edited By: Sunil Chaurasia
Published : Jan 31, 2026 07:37 am IST, Updated : Jan 31, 2026 09:45 am IST
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Photo:HTTPS://X.COM/ADGPI रक्षा पूंजीगत खर्च में भी दर्ज की जा रही है बढ़ोतरी

Defence Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। इस बार बजट से उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। इसी बीच, देश का रक्षा खर्च एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। रक्षा बजट सिर्फ सरकारों, डिफेंस कंपनियों और विशेषज्ञों के लिए ही नहीं बल्कि देश की आम जनता के लिए भी काफी दिलचस्प मुद्दा रहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत अपने रक्षा पर कितना खर्च करती है, लेकिन मौजूदा हालात पहले की तुलना में काफी बदल चुके हैं।

पहले की तुलना में काफी बदल चुकी हैं वर्तमान जंगें

तेजी से बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव, टेक्नोलॉजी-आधारित जंगें और भारत की अपनी सुरक्षा की सोच पारंपरिक खतरों से आगे बढ़कर साइबर युद्ध, अंतरिक्ष और हाइब्रिड चुनौतियों तक फैल गई है। अगर एक्सपर्ट्स की आम सहमति की बात करें तो ज्यादा रक्षा खर्च के लिए उनके पास एक मजबूत तर्क है। हालांकि, एक्सपर्ट इस बात पर भी जोर देते हैं कि इसका जवाब बिना सोचे-समझे बढ़ोतरी में नहीं है। भारत का रक्षा बजट लगातार बढ़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल रक्षा खर्च 2015-16 में लगभग 2.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो दोगुना से काफी ज्यादा है।

रक्षा पूंजीगत खर्च में भी दर्ज की जा रही है बढ़ोतरी

रक्षा पूंजीगत खर्च, जिससे आधुनिकीकरण और नई खरीद को फंड मिलता है, उसमें भी बढ़त दर्ज की गई है। ये 2015-16 में 83,614 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1.92 लाख करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट देश की अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले रक्षा बजट को देखने में विश्वास करते हैं। पिछले एक दशक में नॉमिनल GDP के हिस्से के रूप में रक्षा खर्च में गिरावट आई है। 2020-21 में, कुल रक्षा खर्च GDP का लगभग 2.4% था। जबकि, ये 2024-25 (Revised Estimate) और 2025-26 (Budget Estimate) तक, ये अनुपात गिरकर लगभग 1.9% हो गया था। इस दौरान, ज्यादातर समय में रक्षा पूंजीगत खर्च GDP के लगभग 0.5-0.6% पर काफी हद तक स्थिर रहा है।

एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का कारण बना ये ट्रेंड

कई एक्सपर्ट्स के लिए ये ट्रेंड चिंता का कारण है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत का रक्षा बजट बढ़ाने, खासकर कैपिटल खर्च बढ़ाने के लिए बहुत मजबूत वजह है। उन्होंने तर्क दिया कि कुल रक्षा खर्च को नॉमिनल GDP के कम से कम 3% तक बढ़ाया जाना चाहिए और उस स्तर पर बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत सरकार के कुल खर्च में रक्षा कैपिटल खर्च का हिस्सा लगातार बढ़ना चाहिए। लेकिन एक और जरूरी बात ये है कि जैसे-जैसे GDP बढ़ती है, एक स्थिर या थोड़ा कम प्रतिशत भी एक बड़े एब्सोल्यूट रक्षा बजट का मतलब हो सकता है। सैन्य खर्च के मामले में भारत टॉप 10 देशों में भी शामिल है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के डेटा के अनुसार, भारत ने 2024 में सेना पर 86 बिलियन डॉलक खर्च किए थे, जो दुनिया में 5वां सबसे ज्यादा है।

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