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रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व सीनियर अधिकारियों को ED की 5 दिन की हिरासत, जानें डिटेल

 Published : Apr 16, 2026 11:23 pm IST,  Updated : Apr 16, 2026 11:23 pm IST

यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े कथित लोन घोटाले से संबंधित है। ED ने दोनों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था।

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यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित लोन घोटाले से संबंधित है। Image Source : ANI

दिल्ली की एक कोर्ट ने गुरुवार को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के पूर्व सीनियर अधिकारियों अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को कथित बैंक लोन धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पांच दिन की हिरासत में भेज दिया। पीटीआई की खबर के मुताबिक, कोर्ट के 24 पन्नों के आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि लोन की राशि को कथित तौर पर उन शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिन पर ग्रुप का ही कंट्रोल था। आदेश में यह भी कहा गया कि जांच के दौरान मिले ईमेल जैसे डिजिटल गवाही एजेंसियों की भूमिका को “स्पष्ट” रूप से सामने लाते हैं और करोड़ों रुपये के फंड डायवर्जन की पुष्टि करते हैं।

20 अप्रैल को फिर से कोर्ट में पेश किए जाएंगे

खबर के मुताबिक, ईडी ने दोनों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है। यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित लोन घोटाले से संबंधित है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज हसन अंजार ने अपने आदेश में कहा कि मामले की देनदारियों और हालात को देखते हुए आरोपियों को पांच दिन की ईडी कस्टडी में भेजा जाता है और उन्हें 20 अप्रैल को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा।

इन पदों पर रह चुके थे झुनझुनवाला

अमिताभ झुनझुनवाला रिलायंस ग्रुप में ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के वाइस डिपार्टमेंट और डायरेक्टर भी थे, जो RHFL और RCFL की मूल कंपनी है। वहीं, अमित बापना RCL के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) और RHFL के डायरेक्टर रह चुके हैं। कोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज का पेमेंट नहीं किया गया और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ के रूप में 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम सामने आई है।

कोर्ट ने ये बात भी कही

कोर्ट ने यह भी कहा कि ईमेल और अन्य डिजिटल सबूतों से साफ होता है कि दोनों इनाम फंड को अलग-अलग ट्रांसफर करने और उससे जुड़े दस्तावेजों में शामिल थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, लोन लेने के बाद खरीदार को कई शेल कंपनियों में भेजा गया, जो कथित तौर पर रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के कंट्रोल में थे। हालांकि, झुनझुनवाला के वकील ने दलील दी कि 2017 के एक ईमेल में ADA (अनिल धीरूभाई अंबानी) का जिक्र होने के बावजूद इस पहलू की जांच नहीं की गई। उनका कहना था कि सभी निर्देश शीर्ष प्रबंधन से आते थे, जिन्हें उनके मुवक्किल ने आगे बढ़ाया।

कोर्ट ने बताया - ईमेल से क्या संकेत मिलता है

कोर्ट ने इस दलील को दर्ज करते हुए कहा कि उपलब्ध ईमेल से यह संकेत मिलता है कि कई वेलफेयर जजमेंट शीर्ष प्रबंधन के निर्देशों पर लिए गए थे और संबंधित मेल में उन्हें शामिल भी किया गया था। इसके अलावा, कोर्ट ने 2018 और 2019 के कुछ ईमेल का हवाला देते हुए कहा कि लोन की राशि उसी दिन कुछ उल्लिखित को ट्रांसफर कर दी गई, जिस दिन संबंधित खाता NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित हुए।

27 फरवरी 2019 के एक ईमेल का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि अमित बापना नियमित रूप से झुनझुनवाला को शेल कंपनियों से जुड़ी जानकारी, तारीखें और वित्तीय विवरण बताए थे, जो मामले में उनकी सक्रिय भूमिका को और स्पष्ट करता है।

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