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वाराणसी में आयोजित विश्व संगोष्ठी में शामिल हुईं डॉ. प्रीति अडाणी, कहा- दुनिया बदलने की शक्ति देता है ज्ञान

 Reported By: Nirnay Kapoor,  Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Nov 02, 2026 04:38 pm IST,  Updated : Nov 02, 2026 04:38 pm IST

डॉ. प्रीति अडाणी ने कहा कि प्राचीन ज्ञान सिर्फ इसलिए मूल्यवान नहीं हो जाता कि वो पुराना है। वो तब मूल्यवान बनता है जब हम आज की समस्याओं के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता को समझते हैं।

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डॉ. प्रीति अडाणी Image Source : HTTPS://X.COM/ADANIPRITI

सोमवार को वाराणसी में 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' (Ancient Wisdom for Modern Challenges) विषय पर आयोजित विश्व संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में, अडाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडाणी ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि प्राचीन ज्ञान को आज की समस्याओं से जुड़ना चाहिए और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए।

सभ्यतागत ज्ञान को संरक्षित करने का आह्वान

डॉ. प्रीति अडाणी ने कहा, "प्राचीन ज्ञान सिर्फ इसलिए मूल्यवान नहीं हो जाता कि वो पुराना है। वो तब मूल्यवान बनता है जब हम आज की समस्याओं के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता को समझते हैं।" उन्होंने सभ्यतागत ज्ञान को संरक्षित करने और दुख, असमानता और संघर्षों को दूर करने के लिए इसका इस्तेमाल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "ज्ञान हमें दुनिया बदलने की शक्ति देता है और विवेक हमें ये सुनिश्चित करने में मदद करता है कि हम इसे बेहतर दिशा में बदलें।"

डॉ. प्रीति अडाणी ने अरस्तू और कन्फ्यूशियस का किया उल्लेख

डॉ. अडाणी ने यूनानी दार्शनिक अरस्तू और मानव विकास पर उनके विचारों; भगवान बुद्ध, जिनकी शिक्षाओं में दुखों के निवारण पर जोर दिया गया है; और प्राचीन चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस, जिनकी शिक्षाएं नैतिक आचरण, नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक सद्भाव पर केंद्रित थीं, का उल्लेख किया। उन्होंने इन परंपराओं को भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम' की अवधारणा से जोड़ा और कहा कि जीवन को बेहतर बनाने और सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए इस सभ्यतागत ज्ञान का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

22 राज्यों के 7000 गांवों में काम कर रहा है अडाणी फाउंडेशन

सामुदायिक विकास के क्षेत्र में अपने तीन दशकों के कामों पर चर्चा करते हुए, डॉ. अडाणी ने कहा कि प्रगति को लोगों पर पड़ने वाले उसके प्रभाव से मापा जाना चाहिए। उन्होंने निस्वार्थ भाव से की गई सेवा को समुदायों की बात सुनने और उन्हें अपना भविष्य खुद संवारने में सक्षम बनाने के रूप में परिभाषित किया। 1996 में स्थापित अडाणी फाउंडेशन, जो अडाणी ग्रुप की सामाजिक विकास शाखा है, 22 राज्यों के 7000 गांवों में काम कर रहा है और इससे 1.3 करोड़ लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने 'भारत नॉलेज ग्राफ' का भी जिक्र किया, जिसे अडाणी ग्रुप ने 10 मिलियन डॉलर की मदद देने का वादा किया है। ये पहल भारत के सभ्यतागत ज्ञान को अलग-अलग विषयों के शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाती है और 14 डॉक्टोरल स्कॉलर्स को सहयोग प्रदान करती है।

अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का हिस्सा है वाराणसी संगोष्ठी 

इससे पहले, उद्घाटन सत्र की शुरुआत कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 'सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' के सीनियर रिसर्च स्कॉलर डॉ. निरुपम बाजपेयी के संबोधन से हुई। उन्होंने इस संगोष्ठी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और विचारों तथा आध्यात्मिक परंपराओं के मिलन स्थल के रूप में वाराणसी की ऐतिहासिक भूमिका के बारे में बात की। वाराणसी संगोष्ठी एक अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत ग्रीस से हुई थी। इसके तहत 2022 में एथेंस और 2023 में स्टैगिरा में बैठकें हुईं और इसके बाद 2024 में चीन के कुफू और बीजिंग में आयोजन किए गए।

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