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गंगा एक्सप्रेसवे से लॉजिस्टिक्स पर होगी ₹30,000 करोड़ तक की भारी बचत, सरकार को मिले ₹46,660 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 24, 2026 03:54 pm IST,  Updated : May 24, 2026 03:54 pm IST

ब्लू डार्ट के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी दिपांजन बनर्जी ने कहा कि ये एक्सप्रेसवे पारंपरिक रूटिंग हब पर निर्भरता कम करके उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स परिचालन को पूरी तरह से बदल देगा।

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गंगा एक्सप्रेसवे Image Source : ANI

हाल ही में शुरू हुए 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे से पूरे उत्तर प्रदेश में माल ढुलाई का समय काफी कम होने की उम्मीद है। इससे सालाना लॉजिस्टिक्स पर 30,000 करोड़ रुपये तक की बचत होगी और राज्य के 12 से ज्यादा जिलों में औद्योगिक और भंडार गृह सुविधाओं के विकास को बढ़ावा मिलेगा। ये 6-लेन वाला एक्सप्रेसवे (जिसे 8 लेन तक बढ़ाया जा सकता है) 12 जिलों से होते हुए मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। इसे पश्चिमी और पूर्वी उप्र को जोड़ने वाले एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गलियारे के तौर पर देखा जा रहा है। उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अभी सालाना लगभग 24.5 से 26 करोड़ टन माल की ढुलाई राज्य के भीतर ही होती है। इसमें मुख्य रूप से अनाज, निर्माण सामग्री और खुदरा सामान शामिल होता है। 

मेरठ से प्रयागराज जाने में लगेंगे 5-8 घंटे

वहीं, राज्य से बाहर जाने वाले माल की मात्रा 13.5 से 15 करोड़ टन होने का अनुमान है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा और कृषि उत्पाद प्रमुख हैं। राज्य के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने पीटीआई को बताया कि ये एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, कृषि, पर्यटन और रोज़गार सृजन को गति देकर राज्य की अर्थव्यवस्था में "एक नया अध्याय" लिखेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। इसके शुरू होने से मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय लगभग 10-12 घंटे से घटकर लगभग 5-8 घंटे रह गया है। 

यूपी को पहले ही मिल चुके हैं 46,660 करोड़ रुपये के 987 निवेश प्रस्ताव

मंत्री ने कहा, "ये एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि एक एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गलियारा है। माल की तेज आवाजाही और परिवहन लागत में कमी से सालाना लॉजिस्टिक्स पर 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।" उन्होंने बताया कि इस गलियारे के किनारे राज्य को पहले ही लगभग 46,660 करोड़ रुपये के 987 निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इसके तहत 6,507 एकड़ जमीन पर 12 औद्योगिक केंद्र (नोड्स) विकसित किए जा रहे हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर उद्योग ने क्या कहा

ब्लू डार्ट के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी दिपांजन बनर्जी ने कहा कि ये एक्सप्रेसवे पारंपरिक रूटिंग हब पर निर्भरता कम करके उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स परिचालन को पूरी तरह से बदल देगा। उन्होंने बताया, "जो कड़ी गायब थी, वो एक ऐसा निर्बाध उत्तरी गलियारा था जो राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र को सीधे पूर्वी जिलों से जोड़ता। गंगा एक्सप्रेसवे इस कमी को प्रभावी ढंग से पूरा करता है।" 

हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों के साथ संबंधों को मजबूत बनाएगा गंगा एक्सप्रेसवे

ट्राइटन लॉजिस्टिक्स एंड मैरीटाइम के सीईओ जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि ये एक्सप्रेसवे आपूर्ति श्रृंखला के 'अनुमान' में सुधार करेगा और हवाई कार्गो तथा माल ढुलाई गलियारे के साथ संबंधों को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तरी क्षेत्र में वर्तमान में भारत की कुल हवाई माल ढुलाई का लगभग 31.3 प्रतिशत हिस्सा आता है, और ये एक्सप्रेसवे हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों की ओर माल की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, "यह गलियारा खराब होने वाली वस्तुओं, कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक्स की आवाजाही में सुधार करेगा, और उत्तर प्रदेश की वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।"

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