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सरकार ने प्याज की खरीद कीमत 24.4% बढ़ाई, जानें अब किसानों को कितना मिलेगा भाव

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jun 01, 2026 08:22 pm IST,  Updated : Jun 01, 2026 08:22 pm IST

सरकार ने इस साल के लिए दो लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य तय किया है, जो 2025-26 में खरीदे गए तीन लाख टन से काफी कम है।

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प्याज मंडी Image Source : PTI

सरकार ने बाजार के मौजूदा हालातों और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने बफर स्टॉक कार्यक्रम के तहत प्याज की खरीद कीमत 24.4 प्रतिशत बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलो कर दी है। खाद्य और उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने ये जानकारी दी। अनुपम मिश्रा ने सोमवार को एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हमने प्याज की खरीद कीमत 12.70 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलो कर दी है।'' मौजूदा सत्र के लिए प्याज की खरीद 15 मई को शुरू हुई थी और संशोधित कीमतें 22 मई को अधिसूचित की गई थीं। बाजार में हस्तक्षेप के उद्देश्य से, मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत हर साल बफर स्टॉक बनाए जाते हैं।

इस साल 2 लाख टन प्याज खरीदने का है लक्ष्य

सरकार ने इस साल के लिए दो लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य तय किया है, जो 2025-26 में खरीदे गए तीन लाख टन से काफी कम है। दलहनों के मोर्चे पर, अनुपम मिश्रा ने बताया कि मई में बफर स्टॉक अपने अब तक के उच्चतम स्तर 43 लाख टन पर पहुंच गया है, जो मई 2025 में दर्ज 18 लाख टन से दोगुने से भी ज्यादा है। ये मई 2024 के 21 लाख टन से काफी ऊपर है। मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत खरीद के परिणामस्वरूप अब तक 5.34 लाख टन अरहर और 20.35 लाख टन चना खरीदा गया है। इस योजना के तहत खरीद तब शुरू की जाती है, जब मंडी की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिर जाती हैं। 

घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी होने से आयात पर कम हुई निर्भरता

घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण आयात पर निर्भरता कम हुई है। दालों का आयात 2025-26 में लगभग 30 प्रतिशत घटकर 60 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले 73 लाख टन था। चने का आयात भी 51 प्रतिशत घटकर साल 2024-25 के 15.06 लाख टन से काफी नीचे आ गया। वहीं दालों के लिए मुक्त आयात नीति अभी भी लागू है। अनुपम मिश्रा ने बताया कि दालों की सप्लाई करने वाले प्रमुख देश म्यांमार, तंजानिया, मलावी, मोजाम्बिक, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील पश्चिम एशिया की स्थिति से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं हैं, जिससे सप्लाई से जुड़े जोखिम सीमित हो जाते हैं।

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