ईरान युद्ध के बाद दुनिया में एलपीजी सप्लाई संकट पैदा होने के बाद सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन प्रावधानों के तहत ECA लागू कर दिया है। सरकार की कोशिश है कि ईरान–इजरायल (अमेरिका) संघर्ष के बीच घरेलू गैस की सप्लाई बाधित न हो। इसके तहत सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिक सेक्टर्स के हिसाब से निर्धारित करने के आदेश दिए हैं, ताकि घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों को पर्याप्त मात्रा में गैस मिले और संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।
केंद्र सरकार ने 2026 में प्राकृतिक गैस (सप्लाई रेगुलेशन) आदेश जारी किया, जिसका उद्देश्य घरेलू प्राकृतिक गैस आपूर्ति को सुनिश्चित करना और प्राथमिक सेक्टर्स के लिए पर्याप्त वितरण बनाए रखना है। यह आदेश अधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होगा।
ECA क्या है?
ECA यानी Essential Commodities Act, 1955 भारत का एक अहम कानून है, जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करना है। इस कानून का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को आवश्यक वस्तुएं उचित कीमत पर उपलब्ध हों और उनकी कमी न हो। इस एक्ट के तहत सरकार को यह अधिकार मिलता है कि वह आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित कर सके, भंडारण की सीमा तय कर सके और जमाखोरी या कालाबाजारी को रोकने के लिए कार्रवाई कर सके। जरूरत पड़ने पर सरकार वस्तुओं के स्टॉक को जब्त भी कर सकती है, ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके। इस कानून का मुख्य उद्देश्य बाजार में संतुलन बनाए रखना और आम जनता को आवश्यक वस्तुओं की कमी या महंगाई से बचाना है।
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प्राथमिकता के आधार पर प्राकृतिक गैस आपूर्ति चार सेक्टर्स में बांटा गया:
प्राथमिकता सेक्टर 1
- घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (PNG) आपूर्ति
- परिवहन के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG)
- एलपीजी उत्पादन और एलपीजी की आवश्यकता
- पाइपलाइन कम्प्रेसर ईंधन और अन्य आवश्यक पाइपलाइन संचालन
इन सेक्टरों को उनके पिछले छह महीने के औसत खपत के 100% तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक संचालन के लिए उपलब्धता बनी रहे।
प्राथमिकता सेक्टर 2
- उर्वरक प्लांट्स को उनके पिछले छह महीने की औसत खपत का 70% गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
- प्लांट इस गैस का इस्तेमाल केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही कर सकते हैं और इस बात का प्रमाण पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) को मंत्रालय के माध्यम से देना होगा।
- किसी यूनिट को आवंटित गैस को किसी अन्य यूनिट में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
प्राथमिकता सेक्टर 3
राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनके पिछले छह महीने की औसत खपत का 80% गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक संचालन संभव हो। इस सेक्टर के लिए गैस आवंटन के नियम PPAC और इंडस्ट्री कमेटी के समन्वय से बनाए जाएंगे।
प्राथमिकता सेक्टर 4
सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उनके पिछले छह महीने की औसत खपत का 80% गैस उपलब्ध कराई जाएगी, संचालन की उपलब्धता के अनुसार। नियमों के निर्धारण के लिए भी PPAC और इंडस्ट्री कमेटी सहयोग करेंगे।
गैस का पुनर्वितरण
प्राथमिक सेक्टर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुछ सेक्टरों में गैस की आपूर्ति पूर्ण या आंशिक रूप से घटाई जा सकती है, जैसे कि पेट्रोकेमिकल यूनिट्स, आवश्यकतानुसार पावर प्लांट्स। तेल शोधन कंपनियों को पिछले छह महीने की खपत का लगभग 65% गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक संचालन में बाधा न आए।






































