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E20 फ्यूल को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार ने दिया करारा जवाब! 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों में नहीं मिला इंजन फेल होने का सबूत

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jul 20, 2026 08:25 pm IST,  Updated : Jul 20, 2026 08:26 pm IST

केंद्र सरकार का कहना है कि देशभर में 23 करोड़ से ज्यादा वाहन E20 मिश्रित पेट्रोल पर चल रहे हैं, लेकिन अब तक इंजन फेल होने या वाहन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है।

23 करोड़ गाड़ियों में E20...- India TV Hindi
23 करोड़ गाड़ियों में E20 पेट्रोल से इंजन फेल होने का कोई सबूत नहीं: सरकार Image Source : CANVA

E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से सोशल मीडिया और लोगों के बीच कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। कुछ लोग दावा कर रहे थे कि E20 फ्यूल से इंजन जल्दी खराब हो सकता है और गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर भी असर पड़ता है। अब सरकार ने संसद में इन दावों पर बड़ा जवाब दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि देश में 23 करोड़ से ज्यादा वाहन E20 मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अब तक इंजन फेल होने या गाड़ी खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है।

राज्यसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E20 फ्यूल पर चल रही हैं। इनमें बड़ी संख्या उन पुराने वाहनों की भी है, जिन्हें E20 के लिए विशेष रूप से प्रमाणित नहीं किया गया था। फिर भी अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि E20 पेट्रोल से बड़ी संख्या में गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं।

वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही बढ़ाई गई ब्लेंडिंग

सरकार ने बताया कि E20 कार्यक्रम को जल्दबाजी में लागू नहीं किया गया। वर्ष 2013-14 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी केवल 1.53% थी, वहीं इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 2025-26 में 20% किया गया। इस दौरान नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), SIAM, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और वाहन निर्माताओं के साथ कई दौर के वैज्ञानिक परीक्षण, लैब टेस्ट और फील्ड ट्रायल किए गए।

पुराने वाहनों पर भी नहीं मिला नुकसान का संकेत

सरकार के मुताबिक, एक प्रमुख कार निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें करीब 1.5 करोड़ पुराने और गैर-E20 प्रमाणित वाहन भी शामिल थे। कंपनी को E20 की वजह से इंजन खराब होने का कोई मामला नहीं मिला। इसी तरह एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी अपने सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर बताया कि E20 इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों में नुकसान की दर पहले जैसी ही रही।

माइलेज पर क्या बोली सरकार?

सरकार ने माना कि कुछ पुराने E10 आधारित वाहनों में माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि इसका असर वाहन की स्थिति, ड्राइविंग स्टाइल और सड़क की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। सरकार का कहना है कि E20 फ्यूल का ऑक्टेन नंबर ज्यादा है, जिससे बेहतर दहन, स्मूद इंजन ऑपरेशन और कम प्रदूषण जैसे फायदे मिलते हैं।

फिलहाल E20 से आगे बढ़ने की कोई योजना नहीं

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि इस दिशा में कोई कदम उठाया जाएगा तो उससे पहले वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा कि फिलहाल बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल की अलग से उपलब्धता अनिवार्य करने का भी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

इनपुट- ANI

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