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अनियमित कर्ज देने पर रोक लगाने के लिए सरकार लाई नए कानून का प्रस्ताव, उल्लंघन पर होगी 10 साल तक जेल

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : Dec 19, 2024 10:53 pm IST, Updated : Dec 19, 2024 10:53 pm IST

प्रस्ताव किया गया है कि कोई भी ऋणदाता जो इस कानून का उल्लंघन करते हुए डिजिटल या अन्यथा ऋण प्रदान करता है, उसे कम से कम दो साल की कैद की सज़ा दी जाएगी, जो सात साल तक बढ़ सकती है, साथ ही 2 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

हितधारकों को 13 फरवरी, 2025 तक नए ड्राफ्ट विधेयक पर टिप्पणियां करने के लिए आमंत्रित किया गया है।- India TV Paisa
Photo:FREEPIK हितधारकों को 13 फरवरी, 2025 तक नए ड्राफ्ट विधेयक पर टिप्पणियां करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

केंद्र सरकार ने अनियमित कर्ज देने पर रोक लगाने के लिए एक नए कानून लाने का प्रस्ताव किया है। प्रस्ताव में कानून न मानने वाले या इसका उल्लंघन करने वाले को 10 साल जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, डिजिटल लोन पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कार्य समूह ने नवंबर 2021 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें कहा गया कि अनियमित कर्ज देने की गतिविधियों पर लगाम लगाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना इसका मकसद है।

ड्राफ्ट विधेयक में किया गया है ये प्रस्ताव

खबर के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक में उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की बात रखी गई है, जो रिजर्व बैंक या दूसरे नियामकों द्वारा ऑथोराइज्ड नहीं हैं और किसी दूसरे कानून के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं, ताकि वे पब्लिक लोन देने की कारोबारी गतिविधि शुरू कर सकें। ड्राफ्ट विधेयक में अनियमित कर्ज देने की गतिविधियों को उस लोन के तौर परिभाषित किया गया है जो जो रेगुलेटेड लोन देने को कंट्रोल करने वाले किसी भी कानून के तहत नहीं आते हैं, चाहे वे डिजिटल रूप से किए गए हों या दूसरे माध्यमों से।

होगी इतनी सजा

ड्राफ्ट विधेयक में कहा गया है कि रिश्तेदारों को उधार देने के अलावा दूसरी अनियमित उधार गतिविधियों पर बैन लगाने और उधारकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक व्यापक सिस्टम प्रदान करने के लिए एक अधिनियम होगा। इसमें यह भी प्रस्ताव किया गया है कि कोई भी ऋणदाता जो इस कानून का उल्लंघन करते हुए डिजिटल या अन्यथा ऋण प्रदान करता है, उसे कम से कम दो साल की कैद की सज़ा दी जाएगी, जो सात साल तक बढ़ सकती है, साथ ही 2 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही ऋणदाता, जो उधारकर्ताओं को परेशान करने या ऋण वसूलने के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें तीन से दस साल की कैद और जुर्माना का सामना करना पड़ेगा।

13 फरवरी, 2025 तक मांगी गई है टिप्पणियां

हितधारकों को 13 फरवरी, 2025 तक डिजिटल लोन सहित BULA (अनियमित ऋण गतिविधियों पर प्रतिबंध) टाइटल वाले नए ड्राफ्ट विधेयक पर टिप्पणियां करने के लिए आमंत्रित किया गया है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां कई भोले-भाले उधारकर्ताओं को धोखाधड़ी वाले लोन ऐप द्वारा उनके पैसे से ठगा गया है। कुछ मामलों में, जबरन वसूली के तरीके के कारण आत्महत्याएं हुईं। इससे पहले सरकार ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि वे धोखाधड़ी वाले लोन ऐप के विज्ञापन न दिखाएं। गूगल ने सितंबर 2022 और अगस्त 2023 के बीच अपने प्ले स्टोर से 2,200 से अधिक धोखाधड़ी वाले ऋण ऐप हटा दिए हैं।

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