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मार्च तिमाही में बढ़कर 7.4% हुआ देश का जीडीपी ग्रोथ, जानें वित्त वर्ष 2024-25 कैसी रही आर्थिक वृद्धि

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 30, 2025 04:37 pm IST,  Updated : May 30, 2025 04:59 pm IST

वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी की वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत रही थी। एनएसओ ने राष्ट्रीय खातों के अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में 2024-25 के लिए देश की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत आंकी थी।

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सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 की जनवरी-मार्च तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी किए Image Source : HYUNDAI

GDP Growth Rate: सरकार ने शुक्रवार को देश की जीडीपी से जुड़े अहम और ताजा आंकड़े जारी कर दिए। भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट वित्त वर्ष 2024-25 की जनवरी-मार्च तिमाही में तिमाही आधार पर बढ़कर 7.4 प्रतिशत रहा। वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में देश का जीडीपी ग्रोथ रेट 6.2 प्रतिशत रहा था। हालांकि, सालाना आधार पर जीडीपी ग्रोथ रेट में गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही में देश का जीडीपी ग्रोथ रेट 8.4 प्रतिशत रहा था। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में ये जानकारी दी गई। बताते चलें कि चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़े अनुमानों से बेहतर हैं, जो 6.85 प्रतिशत आंका गया था।

वित्त वर्ष 2023-24 में क्या थी जीडीपी की वृद्धि दर

पूरे वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश की वार्षिक वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी की वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत रही थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च तिमाही में वृद्धि दर के सुस्त पड़ने से पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर पर भी बुरा असर पड़ा, जिससे ये घटकर 6.5 प्रतिशत पर आ गई। एनएसओ ने राष्ट्रीय खातों के अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में 2024-25 के लिए देश की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत आंकी थी। भारत की  एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही है।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए क्या है अनुमान

सीआईआई के अध्यक्ष संजीव पुरी ने 11 मई को कहा था कि चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा था कि ये संख्या मौलिक रूप से हासिल की जा सकती है, क्योंकि तथ्य ये है कि हम एक उचित रूप से अच्छी नींव, मजबूत आर्थिक आधार के साथ शुरुआत कर रहे हैं। कारणों के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में ब्याज दरों में कमी आई है और मुद्रास्फीति भी नरम होती जा रही है।

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