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कौन है गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मालिक? जीरो से खड़ा किया शिक्षा का साम्राज्य, लेकिन अब चीनी रोबोट विवाद ने फंसाया पेंच!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 19, 2026 07:54 am IST,  Updated : Feb 19, 2026 08:34 am IST

दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एक रोबोट डॉग ने ऐसा हंगामा खड़ा किया कि चर्चा सीधे यूनिवर्सिटी के मालिक तक पहुंच गई। ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर कर दिया गया, जब उसके स्टॉल पर प्रदर्शित ‘ओरियन’ नाम का रोबोट असल में एक चीनी कंपनी का प्रोडक्ट निकला।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी...- India TV Hindi
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के मालिक सुनील गलगोटिया Image Source : OFFICIAL WEBSITE

दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के मंच से अचानक बाहर किया जाना किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए बड़ा झटका होता है। इस बार चर्चा के केंद्र में रही गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) जिसने समिट में ‘ओरियन’ नाम से एक रोबोट डॉग पेश किया था। दावा किया गया कि यह यूनिवर्सिटी का इनोवेशन है, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि यह दरअसल चीन की कंपनी Unitree Robotics का मॉडल Unitree Go2 है। विवाद बढ़ा तो यूनिवर्सिटी को सफाई देनी पड़ी।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

समिट में लगे स्टॉल पर यूनिवर्सिटी की ओर से बताया गया कि कैंपस में एआई पर 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है और ओरियन नाम का रोबोट डॉग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का विकसित प्रोडक्ट है। लेकिन टेक्नोलॉजी जगत से जुड़े लोगों ने तुरंत पहचान लिया कि यह वही रोबोट है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से उपलब्ध है और भारत में भी 2-3 लाख रुपये में बिकता है। विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने कहा कि इरादे और प्रस्तुति को लेकर गलतफहमी हुई है।

कौन हैं गलगोटिया यूनिवर्सिटी के फाउंडर?

इस पूरे मामले के बाद यूनिवर्सिटी के मालिक सुनील गलगोटिया चर्चा में आ गए हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी की नींव उन्होंने रखी थी। उनका सफर बेहद साधारण शुरुआत से शुरू हुआ। 1930 के दशक में उनके परिवार का कनॉट प्लेस में एक छोटा सा बुक स्टोर था। दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1980 के दशक में पब्लिशिंग का काम शुरू किया और गलगोटियास पब्लिकेशंस के जरिए अंतरराष्ट्रीय परीक्षा की किताबों के वितरण अधिकार हासिल किए।

40 छात्रों से यूनिवर्सिटी तक का सफर

साल 2000 में उन्होंने गलगोटियास इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (GIMT) की स्थापना की, जहां शुरुआत सिर्फ 40 छात्रों से हुई। इसके बाद इंजीनियरिंग कॉलेज और फिर 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार से यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। आज यूनिवर्सिटी हजारों छात्रों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ देश की जानी-मानी निजी संस्थाओं में गिनी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुनील गलगोटिया का कारोबार हजारों करोड़ रुपये का हो चुका है।

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