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महंगाई का नया हमला! तेल, साबुन, दाल सब महंगे; गिरते रुपये ने बढ़ाई आम आदमी की टेंशन

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 19, 2026 06:50 am IST,  Updated : Feb 19, 2026 06:50 am IST

कुछ महीनों की राहत के बाद महंगाई ने फिर से आम आदमी की जेब पर दस्तक दे दी है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियां अब दाम बढ़ाने लगी हैं। तेल, साबुन, डिटर्जेंट, चाय, नूडल्स, चॉकलेट और अनाज जैसे उत्पादों के पैकेट नए रेट के साथ बाजार में पहुंचने लगे हैं।

महंगाई का झटका!- India TV Hindi
महंगाई का झटका! Image Source : CANVA

देश में महंगाई एक बार फिर आम आदमी के बजट पर भारी पड़ती दिख रही है। रसोई से लेकर बाथरूम तक इस्तेमाल होने वाली रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने लगे हैं।  जो तेल, साबुन, डिटर्जेंट, नूडल्स, चाय और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियां अब 2% से 5% तक कीमतें बढ़ा रही हैं। इसकी बड़ी वजह है कच्चे माल की बढ़ती लागत और डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार कमजोरी।

सितंबर 2025 में जीएसटी में कटौती के बाद कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखी थीं। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स के मुताबिक, डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स और अनाज जैसे प्रोडक्ट्स के नए, महंगे पैकेट बाजार में पहुंचने लगे हैं। कंपनियां कह रही हैं कि बढ़ती लागत के दबाव में यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।

कच्चे तेल और नारियल तेल ने बढ़ाई लागत

कई पर्सनल और होम केयर प्रोडक्ट्स कच्चे तेल से बनने वाले इनपुट्स पर निर्भर होते हैं। हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे सल्फर, एन-पैराफिन और लिक्विड पैराफिन जैसे रसायनों की लागत बढ़ गई है। वहीं, नारियल तेल की कीमतें पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इसका सीधा असर साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट और अन्य उत्पादों की लागत पर पड़ रहा है।

गिरता रुपया बना नया सिरदर्द

रुपये की कमजोरी ने आयातित कच्चे माल को महंगा कर दिया है। ओट्स, बादाम और कुछ अन्य खाने वाली चीजें विदेशों से आती हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया हाल में रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसला, जिससे कंपनियों की इनपुट लागत और बढ़ गई। आयात पर निर्भर कंपनियों के लिए यह बड़ा झटका है।

होम केयर और चाय भी नहीं बची

होम केयर सेगमेंट में भी कीमतें बढ़ने लगी हैं। कुछ कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में और पैकेट महंगे हो सकते हैं। वहीं, चाय की कीमतों में भी हाल में बढ़ोतरी देखी गई है और आगे कच्चे माल की कीमतों के आधार पर बदलाव संभव है।

बिक्री बढ़ी, मुनाफा दबाव में

रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्व में साल-दर-साल वृद्धि के बावजूद कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। जीएसटी कटौती से बिक्री की मात्रा बढ़ी, लेकिन लागत में तेजी से बढ़ोतरी ने मार्जिन कम कर दिए हैं।

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