जीएसटी काउंसिल की बुधवार से शुरू हुई मीटिंग में एक बड़ी सहमति बन गई है। जीएसटी परिषद ने 3 सितंबर को 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की स्लैब को हटाते हुए 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के टैक्स स्लैब को मंजूरी दे दी है। 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब को खत्म कर दिया गया है। नए दोनों स्लैब अब 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीटिंग के बाद देर रात जानकारी देते हुए बताया कि जीएसटी में यह सुधार आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने और राहत दिलाने के लिए किया गया है।
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MSME और स्टार्टअप्स को भी राहत की तैयारी
आज की मीटिंग में इसके अलावा, MSME और स्टार्टअप्स को भी फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। काउंसिल ने व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम करने के लिए कई अहम उपायों को भी मंजूरी दी है। जानकारी के मुताबिक, MSME और स्टार्टअप्स का जीएसटी रजिस्ट्रेशन अब सिर्फ 3 दिनों में संभव होगा। अभी इसमें 30 दिन तक लग जाते हैं। इससे छोटे कारोबारियों को दिक्कत होती है। इसके अलावा, जीएसटी काउंसिल ने कपड़ा, फार्मा, रसायन, उर्वरक और अन्य उद्योगों के लिए उल्टे शुल्क ढांचे के तहत अटके रिफंड को सात दिनों में निपटाने पर सहमति व्यक्त की है।
लग्जरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर बढ़ेगा टैक्स?
देश की प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों- टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, JSW MG मोटर, BYD, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, और हाल ही में भारत में कदम रखने वाली टेस्ला को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। खबर है कि जीएसटी परिषद की आगामी बैठक में ₹20 लाख से अधिक कीमत वाले लक्ज़री ईवी (इलेक्ट्रिक वाहनों) पर जीएसटी दर 5% से बढ़ाकर 18% किए जाने का प्रस्ताव चर्चा के लिए रखा जाएगा।
राजस्व नुकसान की भरपाई की उठी मांग
खबर के मुताबिक, आठ राज्यों-हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि अगर 3 और 4 सितंबर को चल रही जीएसटी परिषद की बैठक में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ढांचे को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो उन्हें होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई की जाए।