देश के आम बजट का दिन शेयर बाजार के लिए हमेशा खास होता है। निवेशकों की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिकी रहती हैं, उंगलियां मोबाइल ऐप पर और दिल धड़कनों की रफ्तार के साथ बजट के हर ऐलान को तौलता है। कभी एक फैसले से बाजार झूम उठता है तो कभी टैक्स या पॉलिसी में बदलाव निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर देता है।
2021 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ है कि बजट के दिन बाजार का रुझान मिला-जुला रहा है। कहीं रिकॉर्ड तेजी दिखी, तो कहीं हल्की गिरावट। कुल मिलाकर सेंसेक्स और निफ्टी में औसतन 0.2 से 0.5 फीसदी का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि, इंडेक्स भले ही सीमित दायरे में रहे हों, लेकिन सेक्टर-वाइज चाल ने कई निवेशकों को मोटा मुनाफा दिया। यूनियन बजट 2026 पेश होने से पहले यह जानना दिलचस्प है कि बीते 5 सालों में बजट के दिन शेयर बाजार का मिजाज कैसा रहा और किन सेक्टरों ने निवेशकों को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाया।
बजट 2021: रिकॉर्ड तेजी का साल
2021 का बजट कोविड महामारी के बाद का पहला बड़ा बजट था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ सेक्टर पर खुलकर दांव लगाया। नतीजा यह हुआ कि बजट के दिन सेंसेक्स करीब 2314 अंक यानी 5 फीसदी उछल गया, जबकि निफ्टी में 4.7 फीसदी की जबरदस्त तेजी आई। यह पिछले दो दशकों का सबसे बेहतरीन बजट डे प्रदर्शन माना गया। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को 5.54 लाख करोड़ रुपये के कैपेक्स ऐलान से बड़ा फायदा हुआ। वहीं, वैक्सीनेशन और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर से फार्मा और हेल्थकेयर स्टॉक्स में भी शानदार तेजी देखने को मिली।
बजट 2022: तेजी के साथ डर भी
2022 के बजट में सरकार ने डिजिटल इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बनाए रखा, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी पर 30 फीसदी टैक्स और 1 फीसदी TDS के ऐलान ने निवेशकों को चौंका दिया। बजट के दिन सेंसेक्स करीब 849 अंक ऊपर बंद हुआ, लेकिन दिन के दौरान 2000 अंकों तक की गिरावट भी देखने को मिली। फार्मा, FMCG, मेटल्स, IT और रियल्टी सेक्टरों को कस्टम ड्यूटी में कटौती और इंफ्रा खर्च से फायदा हुआ, जबकि ऑटो और ऑयल-गैस सेक्टर दबाव में रहे।
बजट 2023: ग्रोथ फोकस, लेकिन बाजार सुस्त
2023 का बजट ग्रोथ-ओरिएंटेड जरूर था, लेकिन बाजार ने इसे खास उत्साह के साथ नहीं लिया। सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ और निफ्टी भी लाल निशान में रहा। फिस्कल डेफिसिट को लेकर चिंताओं और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर PSU बैंक और ऑयल-गैस सेक्टर पर पड़ा। हालांकि, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को 2.4 लाख करोड़ रुपये के कैपेक्स ऐलान से सहारा मिला। IT और फार्मा शेयरों में भी सीमित रिकवरी देखने को मिली।
बजट 2024: टैक्स ने बिगाड़ा खेल
2024 का बजट जुलाई में पेश किया गया और यह कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ोतरी के कारण काफी चर्चा में रहा। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में इजाफे से निवेशकों का मूड बिगड़ा और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, ज्वैलरी सेक्टर के लिए यह बजट खुशखबरी लेकर आया। सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी घटने से ज्वैलरी स्टॉक्स में 5 से 7 फीसदी तक की तेजी देखी गई। इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये के बड़े ऐलान से कंस्ट्रक्शन और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में उछाल आया।
बजट 2025: म्यूटेड रिएक्शन
2025 का बजट अपेक्षाकृत शांत रहा। सेंसेक्स लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि निफ्टी में हल्की गिरावट आई। फिस्कल डिसिप्लिन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार फोकस ने फार्मा, FMCG, IT और रियल्टी सेक्टर को सपोर्ट दिया। टेक्सटाइल सेक्टर को कस्टम ड्यूटी कट से फायदा हुआ, जबकि ऑटो, ऑयल-गैस और PSU बैंक शेयरों पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने का दबाव दिखा।
सबसे ज्यादा फायदा किस सेक्टर को?
बीते 5 सालों के बजट डे ट्रेंड से साफ है कि कुछ सेक्टर लगातार निवेशकों की पहली पसंद बने रहे। आइए उनपर नजर डालते हैं-
- इंफ्रास्ट्रक्चर: हर साल सरकार के कैपेक्स फोकस का सबसे बड़ा लाभार्थी।
- फार्मा और हेल्थ: महामारी के बाद से लगातार मजबूती, R&D और हेल्थ खर्च से सपोर्ट।
- IT और टेक: डिजिटल इंडिया और टेक्नोलॉजी पुश से स्थिर रिटर्न।
- मेटल्स और माइनिंग: कस्टम ड्यूटी कट और इंफ्रा मांग से फायदा।
- रियल्टी और FMCG: शहरी-ग्रामीण खर्च और इंफ्रा बूस्ट का असर।
- ज्वैलरी: 2024 में ड्यूटी कट से शानदार उछाल।
आगे की राह
इतिहास बताता है कि बजट के दिन बाजार में उतार-चढ़ाव तय है, लेकिन लंबे समय में वही सेक्टर जीतते हैं जिन पर सरकार की नीतिगत प्राथमिकता रहती है। 2026 के बजट में EV, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास नजर रहने की उम्मीद है।



































