भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल मार्केट है। भारत ने साल 2022 में जापान को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया। पिछले साल देश में 42 लाख कारों की बिक्री हुई। हालांकि, यह आंकड़ा जितना प्रभावशाली लगता है, घरेलू स्तर पर कार ऑनरशिप स्टेटस उतना उत्साहजनक नहीं है। चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि भारत में केवल 6% परिवारों के पास ही अपनी कार है। यह दर अफ्रीकी देश नाइजीरिया से भी काफी कम है, जहां 18% परिवारों के पास कार है। वहीं, हमारे पड़ोसी और दुनिया के सबसे बड़े ऑटो मार्केट चीन में भी 17% परिवारों के पास अपनी गाड़ी है।
विकसित देशों में कितने % लोगों के पास हैं कारें
Pew Research Centre के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के कई विकसित देश कार स्वामित्व के मामले में भारत से मीलों आगे हैं। इटली इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जहां 89% परिवारों के पास कार है। इटली कई लग्जरी कार ब्रांड्स जैसे फेरारी, लैंबोर्गिनी, मसेराटी और फिएट के लिए जाना जाता है।
अमेरिका में 88% परिवारों के पास अपनी कार
इटली के बाद दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका का नंबर आता है, जहां 88% परिवारों के पास अपनी गाड़ी है। यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी जर्मनी इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है, जहां 85% परिवार कार के मालिक हैं। जर्मनी भी ऑडी, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज, पोर्श और फॉक्सवैगन जैसे वर्ल्ड फेमस कार ब्रांड्स के लिए जाना जाता है।
अन्य प्रमुख देशों की स्थिति
चौथे स्थान पर फ्रांस है, जहां 83% परिवारों के पास कार है। दक्षिण कोरिया (83%), जापान (81%), स्पेन (79%), ग्रीस (76%), यूके (74%), इज़राइल (71%), पोलैंड (64%), रूस (55%), चिली (49%), ब्राजील (47%), अर्जेंटीना (43%), तुर्की (42%), मैक्सिको (35%), दक्षिण अफ्रीका (31%), यूक्रेन (29%) और मिस्र (20%) भी कार स्वामित्व के मामले में भारत से आगे हैं।
पड़ोसी देशों का हाल
भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो पाकिस्तान में केवल 3% और बांग्लादेश में 2% परिवारों के पास कार है, जो भारत के 6% से भी कम है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि एक बड़े ऑटो मार्केट होने के बावजूद, भारत में प्रति व्यक्ति कार स्वामित्व अभी भी काफी कम है और इसमें सुधार की बड़ी गुंजाइश है।