1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. मोबाइल से रातों-रात स्टार बनने लगे लोग! 10,000 करोड़ के पार पहुंचा भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट

मोबाइल से रातों-रात स्टार बनने लगे लोग! 10,000 करोड़ के पार पहुंचा भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Dec 10, 2025 06:48 am IST,  Updated : Dec 10, 2025 06:48 am IST

आज मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि करोड़ों की कमाई का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। रील्स, व्लॉग्स, ट्रेंड्स और क्रिएटिव कंटेंट के इस दौर में आम लोग रातों-रात स्टार बन रहे हैं। और अब इस डिजिटल क्रांति की धाक आधिकारिक आंकड़ों में भी दिखने लगी है।

ब्रांड्स की पहली पसंद...- India TV Hindi
ब्रांड्स की पहली पसंद बने डिजिटल स्टार्स! Image Source : FREEPIK

भारत की डिजिटल दुनिया में इन दिनों एक नई क्रांति चल रही है और वो है इन्फ्लुएंसर क्रांति। स्मार्टफोन और इंटरनेट ने आम लोगों को ऐसा मंच दे दिया है, जहां वे न सिर्फ पॉपुलर हो रहे हैं, बल्कि करोड़ों रुपये के मार्केट को भी आगे बढ़ा रहे हैं। हालात ये हैं कि एक रील, एक वीडियो या एक पोस्ट लाखों की डील में बदल रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट 10 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।

असल खर्च अनुमान से कई गुना बड़ा

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग SaaS प्लेटफॉर्म KlugKlug के मुताबिक, अब तक इस इंडस्ट्री का आकार 3000 से 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा था, लेकिन हकीकत इससे कहीं आगे है। रिपोर्ट में दावा है कि 10,000 करोड़ करोड़ से भी ज्यादा खर्च भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर हो चुका है। यानी मार्केट पहले बताए गए अनुमान से तीन गुना बड़ा है।

75% खर्च सीधे ब्रांड और क्रिएटर के बीच

रिपोर्ट के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर खर्च होने वाला सिर्फ 25% पैसा ही एजेंसियों या ट्रैक किए जाने वाले सिस्टम से होकर गुजरता है। बाकी 75% पैसा ब्रांड्स और इन्फ्लुएंसर्स के बीच सीधे डील में खर्च होता है, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं बन पाता। इसी वजह से अब तक इस इंडस्ट्री का असली आंकड़ा सामने नहीं आ पाता था और सारी तस्वीर गलत दिखती रहती थी।

माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर बन रहे पावरहाउस

अक्सर माना जाता है कि सिर्फ बड़े इन्फ्लुएंसर ही ब्रांड्स को आकर्षित करते हैं, पर KlugKlug के एनालिसिस से पता चलता है कि असली गेम-चेंजर माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर हैं। छोटे लेकिन प्रभावशाली इन क्रिएटर्स की वजह से ब्रांड्स बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंच पा रहे हैं।

D2C ब्रांड्स बदल रहे इंडस्ट्री का खेल

100 से ज्यादा D2C ब्रांड्स हर साल 20 करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे अपनी ही कंपनी की क्रिएटर टीम पर खर्च कर रहे हैं। यानी वे अब बाहरी एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहते। इसका मतलब है कि कंपनियां खुद ही वीडियो, रील और कंटेंट बनवाकर प्रमोशन कर रही हैं। इससे साफ दिखता है कि मार्केटिंग का पुराना तरीका बदल रहा है और ब्रांड अब अपने खुद के क्रिएटर्स पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।

बार्टर और प्रोडक्ट सीडिंग बन रहे स्मार्ट हथियार

कई ब्रांड्स इन्फ्लुएंसर्स को अपने प्रोडक्ट मुफ्त में भेज देते हैं या बार्टर के रूप में सामान देकर उनसे प्रमोशन करवाते हैं। इसमें पैसे का सीधा लेन-देन भले ही नहीं होता, लेकिन इससे ब्रांड को बहुत फायदा मिलता है क्योंकि उनका प्रोडक्ट ज्यादा लोगों तक पहुंचता है और उनका नाम तेजी से फैलता है। यही वजह है कि ऐसे सहयोग का मार्केट पर बड़ा असर पड़ता है।

AI और ऑटोमेशन से इंडस्ट्री में नई क्रांति

KlugKlug के CEO कल्याण कुमार के अनुसार, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग अब सिर्फ ग्रोथ नहीं कर रही, बल्कि पॉजिटिव बदलाव से गुजर रही है। AI और प्रिसिजन टारगेटिंग के चलते कंटेंट, कॉमर्स और कंज्यूमर इंटेंट एक साथ जुड़ गए हैं।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा